पारदर्शिता है जरूरी
जज के निवास पर भारी मात्रा में नोटों के मिलने के विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीशों के बारे में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
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अब पदभार ग्रहण करने के बाद सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपनी संपत्ति सार्वजनिक रूप से घोषित करने पर न्यायाधीशों ने सहमति जताई है। जजों की पूर्ण बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। यह खुलासा पूर्णतया स्वैच्छिक होगा।
देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना सहित सर्वोच्च न्यायालय के तैंतीस जजों में से तीस जजों ने अपनी संपत्ति की घोषणा की। पूर्ण पीठ द्वारा संकल्प लिया गया कि जब भी कोई महत्त्वपूर्ण अधिग्रहण किया जाए तो इसकी घोषणा मुख्य न्यायाधीश के समक्ष करनी चाहिए। हालांकि यह विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आवास से आग लगने की घटना के बाद कथित तौर पर मिली नगदी के बाद यह बड़ा निर्णय लिया गया है। न्यायपालिका में पारदर्शिता और लोगों का विश्वास बनाए रखने की लिहाज से यह कदम दूरगामी साबित हो सकता है।
यह प्रस्ताव सभी भावी जजों पर लागू होगा। हाई कोटरे को भी इसका अनुसरण करना चाहिए। 1977 में भी इसी तरह के प्रस्ताव रखे जाने के बावजूद इन पर अमल नहीं लाया जा सकता था। चूंकि बीते दिनों उठे विवादों को लेकर काफी चिंता व्यक्त की जा रही है, इसलिए उम्मीद की जा सकती है कि इस घोषणा की उपेक्षा नहीं की जाएगी।
यूं तो राजनेताओं के पास मिलने वाली आय से अधिक संपत्ति के बाद संपत्ति की घोषणा भले ही की जा रही है मगर उसे जनता द्वारा संदेह की नजर से ही देखा जाता है। दूसरे, उन्होंने यह संपत्ति कहां से और कैसे अर्जित की, यह सवाल खड़ा ही रहता है।
जीवन साथी या परिवार के अन्य सदस्यों के नाम जमा राशि या जमीन-जायदाद के मामले किसी से छिपे नहीं हैं। भ्रष्टाचार व काले धन को लेकर मोदी सरकार सत्ता में आने से पहले जितनी मुखर थी, अब उतनी मौन ओढ़े है।
बहरहाल, सबसे बड़ी अदालत ने अनाप-शनाप काला धन कबाड़ने वालों को बड़ा संकेत दिया है। इस मसले में सरकार से नाउम्मीद हो चुकी जनता का अदालत पर भरोसा तो बढ़ेगा ही, साथ ही नई उम्मीद भी जाग सकती है।
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