कौन थी शबरी

Last Updated 13 Apr 2020 12:50:23 AM IST

शबरी की कहानी रामायण के अरण्य काण्ड में आती है। वह भीलराज की अकेली पुत्री थी। जाति प्रथा के आधार पर वह एक निम्न जाति में पैदा हुई थी।


श्रीराम शर्मा आचार्य

विवाह में उनके होने वाले पति ने अनेक जानवरों को मारने के लिए मंगवाया। इससे दुखी होकर उन्होंने विवाह से इनकार कर दिया। फिर वह अपने पिता का घर त्यागकर जंगल चली गई और वहां ऋषि मतंग के आश्रम में शरण ली। ऋषि मतंग ने उन्हें अपनी शिष्या स्वीकार कर लिया। इसका भारी विरोध हुआ। ऋषि मतंग जब परम धाम को जाने लगे तब उन्होंने शबरी को उपदेश किया कि वह परमात्मा में अपना ध्यान और विश्वास बनाए रखें। उन्होंने कहा कि परमात्मा सबसे प्रेम करते हैं।

उनके लिए कोई इंसान उच्च या निम्न जाति का नहीं है। उनके लिए सब समान हैं। फिर उन्होंने शबरी को बताया कि एक दिन प्रभु राम उनके द्वार पर आएंगे। ऋषि मतंग के स्वर्गवास के बाद शबरी ईश्वर भजन में लगी रही और प्रभु राम के आने की प्रतीक्षा करती रहीं। लोग उन्हें भला बुरा कहते, उनकी हंसी उड़ाते पर वह परवाह नहीं करती। उनकी आंखें बस प्रभु राम का ही रास्ता देखती रहतीं। और एक दिन प्रभु राम उनके दरवाजे पर आ गए। शबरी धन्य हो गई। उनका ध्यान और विश्वास उनके इष्टदेव को उनके द्वार तक खींच लाया।

उन्होंने प्रभु राम को अपने झूठे फल खिलाये और दयामय प्रभु ने उन्हें स्वाद लेकर खाया। फिर वह प्रभु के आदेशानुसार प्रभुधाम को चली गई। शबरी की कहानी से क्या शिक्षा मिलती है? आइये इस पर विचार करें। कोई जन्म से ऊंचा या नीचा नहीं होता। व्यक्ति के कर्म उसे ऊंचा या नीचा बनाते हैं। हम किस परिवार मैं जन्म लेंगे इस पर हमारा कोई अधिकार नहीं है। पर हम क्या कर्म करें इस पर हमारा पूरा अधिकार है। जिस काम पर हमारा कोई अधिकार ही नहीं है, वह हमारी जाति का कारण कैसे हो सकता है।

व्यक्ति की जाति उसके कर्म से ही तय होती है, ऐसा भगवान खुद कहते हैं। प्रभु राम ने शबरी को भामिनी कह कर संबोधित किया। भामिनी शब्द एक अत्यन्त आदरणीय नारी के लिए प्रयोग किया जाता है। प्रभु राम ने कहा की हे भामिनी सुनो मैं केवल प्रेम के रिश्ते को मानता हूं। तुम कौन हो, तुम किस परिवार में पैदा हुई, तुम्हारी जाति क्या है, यह सब मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता। तुम्हारा मेरे प्रति प्रेम ही मुझे तुम्हारे द्वार पर लेकर आया है।



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