Parliament Budget Session: संसद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, वक्फ बिल सहित 16 विधेयक पारित

Last Updated 04 Apr 2025 04:21:23 PM IST

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित करते हुए कहा कि बजट सत्र के दौरान वक्फ (संशोधन) विधेयक सहित कुल 16 विधेयक पारित किये गए।


लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (फाइल फोटो)

इसके साथ ही, 31 जनवरी को शुरू हुआ बजट सत्र संपन्न हो गया।

लोकसभा के बाद राज्यसभा भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है। 

बिरला ने विपक्षी सदस्यों के शोरगुल और नारेबाजी के बीच कहा, ‘‘इस सत्र में 26 बैठकें हुईं तथा कुल उत्पादकता 118 प्रतिशत से अधिक रही। राष्ट्रपति (द्रौपदी मुर्मू) के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में 173 सदस्यों ने भागीदारी की।’’

बिरला ने कहा कि सदन में केंद्रीय बजट पर चर्चा में 169 सदस्यों ने भाग लिया, वहीं सत्र के दौरान 10 सरकारी विधेयक पुर:स्थापित किये गए और वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 सहित कुल 16 विधेयक पारित किये गए।

इससे पहले, शुक्रवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की एक टिप्पणी को लेकर उनसे माफी की मांग करते हुए हंगामा किया। वहीं, विपक्षी सदस्यों ने अमेरिका के जवाबी शुल्क (टैरिफ) को लेकर सदन में हंगामा किया।

हालांकि, सदन में हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ने प्रश्नकाल शुरू कराया।

महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी अपने मंत्रालय से संबंधित एक पूरक प्रश्न का उत्तर देने के लिए खड़ी हुईं, तब भी भाजपा सदस्यों का हंगामा जारी रहा।

भाजपा सदस्य निशिकांत दुबे ने सोनिया गांधी का नाम लिये बिना कहा, ‘‘उन्होंने संसद का अपमान किया है। वह जब चाहती हैं संसद पर हमला करती हैं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पर हमला करती हैं।’’

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं।

इस बीच, विपक्षी सदस्यों ने ‘प्रधानमंत्री जवाब दो’ और ‘प्रधानमंत्री सदन में आओ’ के नारे लगाए।

नारेबाजी नहीं थमने पर बिरला ने पूर्वाह्न करीब 11 बजकर पांच मिनट पर सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की प्रमुख सोनिया गांधी ने बृहस्पतिवार को सरकार पर वक्फ (संशोधन) विधेयक को मनमाने ढंग से पारित कराने का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि यह विधेयक संविधान पर सरेआम हमला है तथा यह समाज को स्थायी ध्रुवीकरण की स्थिति में बनाए रखने की भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

बजट सत्र के आखिरी दिन, एक बार के स्थगन के बाद लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे फिर से शुरू होने पर सदन में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू द्वारा सोनिया की उक्त टिप्पणी का उल्लेख किए जाने के बाद, बिरला ने कहा कि एक वरिष्ठ सदस्य द्वारा लोकसभा की कार्यवाही पर प्रश्न उठाना उचित नहीं है।

बिरला ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सदन की कार्यवाही पर एक वरिष्ठ सदस्य द्वारा प्रश्न उठाया गया। उन्होंने कहा कि यह संसदीय लोकतंत्र की मर्यादा के अनुरूप नहीं है।

इस बीच, कांग्रेस के सदस्यों ने भी अपनी बात रखने का आग्रह करते हुए सदन में हंगामा किया।

इसके कुछ मिनट बाद ही बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।

बजट सत्र के दौरान, लोकसभा द्वारा विभिन्न मंत्रालयों के लिए अनुदान की मांगों के साथ-साथ वित्त विधेयक को मंजूरी दिए जाने के साथ सरकार ने बजटीय प्रक्रिया संपन्न कर ली।

राष्ट्रपति शासन के अधीन मणिपुर के लिए भी बजट को सदन ने मंजूरी प्रदान की।

राज्यसभा का 267वां सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, 119 प्रतिशत कामकाज हुआ

राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गयी तथा सत्र के दौरान उच्च सदन में 119 प्रतिशत कामकाज हुआ।

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने उच्च सदन के 267वें सत्र को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने से पहले अपने पारंपरिक संबोधन में कहा कि इस दौरान सदन में वक्फ (संशोधन) विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुयी। उन्होंने बताया कि सत्र के दौरान 159 घंटे में 119 प्रतिशत कामकाज हुआ। इस सत्र में 49 निजी विधेयक पेश किए गए।

उन्होंने कहा कि इस सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव और बजट पर लंबी चर्चा हुयी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा तीन दिन तक चली और इसमें 73 सदस्यों ने हिस्सा लिया।


सभापति ने बताया कि बजट 2025-26 पर भी तीन दिन तक चर्चा हुई जिसमें 89 सदस्यों ने हिस्सा लिया।

उन्होंने बताया कि इसके साथ ही चार महत्वपूर्ण मंत्रालयों... गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, रेल मंत्रालय एवं शिक्षा मंत्रालय के कामकाज पर भी चर्चा हुयी।

धनखड़ ने कहा कि तीन अप्रैल को उच्च सदन की कार्यवाही पूर्वाह्न 11 बजे से शुरू होकर अगले दिन यानी चार अप्रैल को सुबह चार बज कर दो मिनट तक चली जो अब तक की सबसे लंबी बैठक थी। सभापति ने कहा ‘‘यह उच्च सदन के इतिहास में सबसे अधिक लंबे समय तक चली कार्यवाही है। इससे लोगों तक बहुत अच्छा संदेश गया।’’

उन्होंने कहा कि इस मैराथन बैठक के दौरान, सदन ने परिवर्तनकारी वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को मंजूरी दी जिसमें समानता और न्याय के सिद्धांतों को कायम रखते हुए वक्फ संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रावधान हैं।

सभापति ने कहा कि यह सत्र अपनी ऐतिहासिक विधायी उपलब्धियों और एकता की भावना के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह भारत की संसदीय यात्रा में एक निर्णायक क्षण रहा और इसने याद दिलाया कि संवाद और साझा मकसद के माध्यम से क्या हासिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि उच्च सदन ने एक बार फिर दूसरों के लिए अनुकरणीय लोकतांत्रिक मानक स्थापित किए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘...इसी के साथ संसद के बजट सत्र का समापन हो रहा है और मैं आप सभी के प्रति आभार व्यक्त करता हूं कि आपने चर्चाओं और विचार-विमर्श में सक्रिय रूप से भाग लिया और बहुमूल्य योगदान दिया।’’

उन्होंने कहा कि इस सत्र के दौरान चर्चा में काफी जानकारी भरी बातें सुनने को मिलीं वहीं अलग-अलग राय भी सामने आईं। उन्होंने कहा कि एक लंबे अंतराल के बाद सदन में हास्य, व्यंग्य और हाजिरजवाबी के अलावा बौद्धिकता, संसदीय शिष्टाचार, अंतर-दलीय सहयोग और विधायी दृढ़ता भी देखी गई।

सभापति ने सहयोग के लिए उपसभापति हरिवंश, पीठासीन अध्यक्षों, सदन के नेता एवं विपक्ष के नेता, सदन में सभी दलों के नेताओं एवं उच्च सदन के महासचिव और कर्मचारियों की सराहना की तथा सभी के प्रति आभार जताया।

इस सत्र के दौरान सदन में वक्फ़ (संशोधन) विधेयक 2025, आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक 2024, बैंककारी विधियां (संशोधन) विधेयक 2024, आप्रवास एवं विदेशी विषयक विधेयक 2025, तेलक्षेत्र (विनियमन तथा विकास) संशोधन विधेयक 2024, वायुयान वस्तुओं में हित संरक्षण विधेयक 2025 तथा त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी विधेयक 2025 जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए।

तीन अप्रैल की बैठक में, देश भर में वक्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के मकसद से लाए गए वक्फ़ (संशोधन) विधेयक 2025 को देर रात मंजूरी दी गई। उसके बाद, मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की पुष्टि करने वाले सांविधिक संकल्प को पारित किया गया। हिंसाग्रस्त मणिपुर में 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। उच्चतम न्यायालय के एक निर्णय के अनुरूप दो महीने के अंदर राष्ट्रपति शासन की पुष्टि के लिए एक सांविधिक संकल्प सदन में चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किया गया और शुक्रवार तड़के करीब चार बजे इस संकल्प को ध्वनिमत से मंजूरी दी गई।

गौरतलब है कि उच्च सदन के 267वें सत्र की शुरुआत 31 जनवरी को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति अभिभाषण के साथ हुई थी। इस सत्र का पहला चरण 13 फरवरी तक चला था। दूसरा चरण 10 मार्च से शुरू हुआ था और आज संपन्न हुआ।
 

आईएएनएस/भाषा
नई दिल्ली


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