Waqf Bill: JPC अध्यक्ष जगदंबिका पाल बोले- 'वक्फ संशोधन विधेयक 2024 होगा पास', विपक्ष ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

Last Updated 02 Apr 2025 10:39:11 AM IST

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को आज लोकसभा में पेश किया जाएगा। इस बिल पर चर्चा के लिए स्पीकर ओम बिरला ने 8 घंटे का समय तय किया है।


बिल को एक ओर जहां जेपीसी अध्यक्ष जगदंबिका काल ने कल्याणकारी बताया तो वहीं विपक्ष के कई नेताओं ने इसका पुरजोर विरोध किया।

न्यूज एजेंसी से बातचीत में जगदंबिका पाल ने कहा, “आज वक्फ संशोधन बिल पेश होगा। सरकार ने इसे जेपीसी को भेजा था, हमने 6 महीने मेहनत की। विपक्ष कह रहा था कि यह बिल रुक जाएगा, बिहार चुनाव तक लटकेगा, लेकिन सरकार इसे लेकर आई है। यह बिल पास होगा। इससे गरीब, पिछड़े और आम मुसलमानों को फायदा होगा, जो अभी तक नहीं मिल रहा था।”

उन्होंने बताया, “वक्फ की इतनी बड़ी संपत्ति है, फिर भी इसे बेचने की बातें होती थीं, जबकि यह बिक नहीं सकती। देखभाल करने वालों को फायदा मिलता था। 2013 के यूपीए संशोधन ने बोर्ड को ऐसी ताकत दी थी, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 300ए का उल्लंघन करती थी। आज हम इसे ठीक कर रहे हैं।”

पाल ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, “राहुल गांधी को संविधान का ज्ञान है? वे अपनी सरकार के बिल को फाड़ते थे। पहले इसे पढ़ें, फिर चर्चा करें। जेपीसी में झगड़ा, जंतर-मंतर पर धरना—यह सब क्यों? हमारा मकसद सबका विकास है।

वहीं, सपा नेता अबू आजमी ने बिल को मुसलमानों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा, “अगर यह बिल पास हुआ, तो आज का दिन बहुत बुरा होगा। हमारी पूरी कोशिश होगी कि इसे रोका जाए। सरकार की नीयत मुसलमानों के लिए खराब है। वे हमारा निजी कानून खत्म करना चाहते हैं। हर मस्जिद के नीचे मंदिर दिखता है। छत पर नमाज नहीं पढ़ सकते। सड़क पर 5 मिनट नमाज पढ़ें, तो लाइसेंस रद्द कर देते हैं। यह क्या है? मैं सभी सांसदों से कहता हूँ, इंसानियत के नाते इसका विरोध करें।”आजमी ने कहा कि मुस्लिम संगठन इसकी रणनीति बनाएँगे और बड़ा आंदोलन होगा।

कांग्रेस ने इस विधेयक का कड़ा विरोध करने का ऐलान किया है। कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा, "हमारी पार्टी का रुख साफ है। हम इस बिल का सदन में विरोध करेंगे।" सांसद मल्लू रवि ने कहा, "यह बिल मुसलमानों के हितों को नुकसान पहुंचाएगा, इसलिए हम इसका विरोध करेंगे।"

कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने कहा, “हम इस बिल का विरोध करेंगे। कल संसद में इंडिया ब्लॉक की बैठक हुई। हमने सर्वसम्मति से इसका विरोध करने का फैसला किया।”

सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने कहा, “यह बिल बड़े वर्ग की संपत्ति और निजी जमीनों में दखल दे रहा है। सरकार की मंशा पर सवाल उठता है।”

कांग्रेस के मणिकम टैगोर ने कहा, “राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने इंडिया ब्लॉक के 22 दलों के साथ 2 घंटे से ज्यादा चर्चा की। हम बहस करेंगे, दबाव बनाएंगे और इसके खिलाफ वोट करेंगे।”

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, “यह बिल एक धार्मिक समुदाय को निशाना बना रहा है। पिछले 10-11 सालों में लव जिहाद, थूक जिहाद, फ्लड जिहाद जैसे मुद्दे उठाए गए। बुलडोजर जस्टिस चल रहा है। एक पार्टी का एजेंडा है कि एक धर्म को निशाना बनाकर बाकियों को अपने पक्ष में कर चुनाव जीतें। आज वोटिंग से पता चलेगा कि कौन सेक्युलर है। भाजपा तो पक्ष में वोट देगी, यह उनका राजनीतिक एजेंडा है। टीडीपी संशोधन लाई है, वे समर्थन करेंगे क्योंकि उनका चुनाव दूर है। जदयू को बिहार चुनाव के चलते सोचना होगा। शायद वॉकआउट करें, ताकि भाजपा को मौका मिले। चिराग पासवान की पार्टी भी ऐसा कर सकती है।”

सिब्बल ने पीएम मोदी से सवाल किया, “हिंदू धर्म में सुधार क्यों नहीं लाते? मस्जिद गिरती है, संभल में हंगामा होता है, आप चुप रहते हैं। हिंदू वसीयत में बेटियों को संपत्ति नहीं मिलती, इसके लिए क्या किया? ट्रिपल तलाक ठीक किया, लेकिन हिंदू महिला को घर से निकाला जाता है, उसके लिए क्या किया? एक धर्म के लिए इंसाफ लड़ते हैं, तो सबके लिए लड़ें। हम साथ देंगे। चुनिंदा काम से यह संदेश जाता है कि आप एक धर्म के खिलाफ हैं। यह संविधान के खिलाफ है।”

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने भी बिल की आलोचना की। उन्होंने कहा, "सरकार को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के सुझावों को गंभीरता से लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह बिल वक्फ की संपत्तियों को नष्ट करने की साजिश है। अगर यह पास हो जाता है, तो हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और कानूनी रास्ता अपनाएंगे।"

उन्होंने यह भी कहा कि विरोध शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से होना चाहिए।

दरगाह शरीफ के खादिम हाजी पीर नफीस मियां चिश्ती ने कहा, "यह बिल मुसलमानों के हक और उनकी संपत्तियों पर हमला है। इसमें गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने का प्रावधान है, जो ठीक नहीं। जैसे हिंदू ट्रस्ट में मुसलमानों की एंट्री नहीं होती, वैसे ही वक्फ में गैर-मुस्लिमों की क्या जरूरत? मुस्लिम परंपराओं को वही समझ सकता है, जो उसका हिस्सा हो।"

उन्होंने सरकार से अपील की कि इस बिल में मुसलमानों के हितों की रक्षा की जाए।

बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने बिल का समर्थन करते हुए कहा, "यह बिल सामाजिक न्याय के लिए लाया गया है। जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी ने देशभर से सुझाव लिए, जिनमें मुस्लिम समुदाय के सुझाव भी शामिल हैं। इसमें आपराधिक फैसलों को चुनौती देने का प्रावधान भी है। विपक्ष इसे जाति और धर्म के नाम पर गलत तरीके से पेश कर रहा है, लेकिन जब बिल का पूरा ब्योरा सामने आएगा, तो लोगों को इसकी सकारात्मकता समझ आएगी।"

अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता अनिस अब्बास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि इस बिल के जरिए वक्फ बोर्ड की लूट की दुकान बंद हो रही है। साथ ही, उन्होंने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ओवैसी और उनके साथियों ने वक्फ की जमीनों का गलत इस्तेमाल किया है।

अनिस अब्बास ने कहा, "आज देश की जनता और हम सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का धन्यवाद करना चाहते हैं। वक्फ बोर्ड के नाम पर जो लूट की फैक्ट्री चल रही थी, उसका लाइसेंस मोदी जी ने रद्द कर दिया है।" उन्होंने दावा किया कि इस बिल से वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर पारदर्शिता आएगी और अवैध कब्जों पर रोक लगेगी। अब्बास ने कहा कि इस कदम से कुछ राजनीतिक दल परेशान हैं, क्योंकि उनकी लूट की दुकान बंद हो रही है।

अनिस अब्बास ने असदुद्दीन ओवैसी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "ओवैसी कहते हैं कि वक्फ के नाम पर मस्जिदों की जमीन छीनी जा रही है। लेकिन उनके अपने साथियों ने क्या किया? एक मस्जिद को तोड़कर उसकी जगह जेडब्ल्यूएस मेट्रो होटल बना दिया। यह होटल ओवैसी के साथी का है। इसके अलावा, ओवैसी के स्कूल जो 3,000 एकड़ में चल रहा है, वह भी वक्फ की जमीन पर है।" अब्बास ने सवाल उठाया कि ओवैसी बताएं उन्होंने वक्फ की संपत्ति से कितने बच्चों को इंजीनियर, डॉक्टर, आईएएस या आईपीएस बनाया?

अनिस अब्बास ने आगे कहा, "भारत में वक्फ की एक भी ऐसी संपत्ति नहीं है, जिसके जरिए आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर या इंजीनियर तैयार किए गए हों। वक्फ की जमीनों का इस्तेमाल सिर्फ निजी फायदे के लिए हुआ है।" उन्होंने ओवैसी के उस बयान पर भी पलटवार किया जिसमें उन्होंने कहा था कि यह बिल मुसलमानों पर थोपा जा रहा है। अब्बास ने कहा, "यह गलत है। देश के हर राज्य से मुसलमानों ने अपनी राय दी है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा- हर जगह से सुझाव लिए गए हैं। सभी समाजों का पक्ष सुना गया है।"

अजमेर दरगाह प्रमुख के उत्तराधिकारी और ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने बिल का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह बिल वक्फ की पुरानी खामियों को दूर करेगा और संपत्तियों की लूट को रोकेगा। साथ ही, इसका फायदा गरीब मुसलमानों को मिलेगा।

सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा, "हम काफी समय से इस बदलाव का इंतजार कर रहे थे। आज वह घड़ी आ गई है। दोपहर 12 बजे के करीब यह बिल संसद में पेश होगा। मुझे उम्मीद है कि इस पर अच्छी बहस होगी और एक बेहतर कानून पास होगा।"

बिल का विरोध कर रहे लोगों पर चिश्ती ने कहा, "लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने का हक है। कुछ लोग विरोध कर रहे हैं, लेकिन आम जनता को शायद यह समझ नहीं आ रहा होगा। लोग वही मान रहे हैं, जो उनके नेता बता रहे हैं।" उन्होंने विरोधियों के उस दावे को खारिज किया कि इस बिल से दरगाहें, खानकाहें या धार्मिक संपत्तियां छिन जाएंगी। चिश्ती ने कहा, "यह कहना गलत है कि धार्मिक संपत्तियां छिनेंगी। मैं सरकार के आधिकारिक बयान पर भरोसा करता हूं और दूसरों को भी ऐसा करने की सलाह दूंगा।"
 

आईएएनएस
नई दिल्ली


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