बसपा नेता की हत्या की जांच पाखंड : सुप्रीम कोर्ट

Last Updated 15 Dec 2020 05:31:04 AM IST

बहुजन समाज पार्टी के नेता रामबिहारी चौबे की हत्या की पांच साल से चल रही जांच को सुप्रीम कोर्ट ने पाखंड कहा है।


सुप्रीम कोर्ट

भाजपा विधायक के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट लगाने पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस को बुरी तरह फटकारा। सुप्रीम कोर्ट ने बनारस की पुलिस से जांच छीनकर एक आईपीएस अफसर को जांच अधिकारी नियुक्त किया है।
जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन, नवीन सिन्हा और कृष्ण मुरारी की बेंच ने मृतक के बेटे अमरनाथ चौबे की याचिका पर उत्तर-प्रदेश कैडर के आईपीएस सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज को जांच अधिकारी नियुक्त किया। पंकज से कहा गया है कि वह अपनी पसंद से जांच टीम का गठन करें और दो माह के अंदर जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपे। यूपी के डीजीपी से कहा गया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार नए जांच अधिकारी को समस्त साधन मुहैया कराएं।
राम बिहारी चौबे की वाराणसी के गांव श्रीकंठपुर में चार दिसम्बर 2015 की सुबह हत्या कर दी गई थी। इस संबंध में चौबेपुर थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। रामबिहारी 2012 का विधानसभा चुनाव चंदली जिले के एक विधान सभा क्षेत्र से लड़ चुके थे। विधानसभा के अलावा पंचायत चुनाव को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक खींचतान चली आ रही थी। सुप्रीम कोर्ट इस बात से खासा नाराज था कि जांच में विधायक के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने के बाद भी यूपी पुलिस ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दायर कर दी। पुलिस की जांच में चार अन्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया था और तफ्तीश से पुलिस को पता चला कि चौबे की हत्या भाड़े के हत्यारों ने पांच लाख रुपए में की। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अप्रैल 2017 में ही विधायक के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने का आरोप लग गया था और पुलिस ने आईपीसी की धारा 120बी भी जोड़ दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डीजीपी को नोटिस जारी करने के बाद पुलिस ने विधायक सुशील सिंह के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दायर कर दी। जांच और क्लोजर रिपोर्ट से पता चलता है कि इस मामले में तथ्यों को छुपाया गया है। जांच के नाम पर पाखंड किया गया है। एसएसपी ग्रामीण की भूमिका पर भी सुप्रीम कोर्ट उंगली उठाई। बेंच ने कहा कि पुलिस का यह कहना कि मृतक के बेटे ने विधायक के खिलाफ कोई सबूत पेश नहीं किए, हास्यास्पद है। सबूत जुटाना पुलिस की वैधानिक डयूटी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब पुलिस की जांच साफतौर पर पक्षपातपूर्ण हो तो अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन अभियुक्तों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया जा चुका है, उनके खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा। क्लोजर रिपोर्ट पर स्टे दे दिया गया। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई दो माह बाद करेगा।

सहारा न्यूज ब्यूरो/विवेक वार्ष्णेय
नई दिल्ली


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