मशहूर पहलवान-अभिनेता दारा सिंह का निधन
बीते जमाने के मशहूर पहलवान और अभिनेता दारा सिंह का गुरुवार सुबह 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया.
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अभिनेता दारा सिंह काफी दिनों से बीमार थे. मुबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अम्बानी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती थे.दारा सिंह को शनिवार को अस्पताल में दाखिल कराया गया था.
दारा को कुश्ती के लिए ‘रुस्तम-ए-हिंद' का खिताब मिला 1952 में फिल्म ‘संगदिल' से अभिनय के क्षेत्र में आए |
उनके नजदीकी मित्रों धर्मेद्र, रजा मुराद, फरहा खान व अन्य ने अस्पताल जाकर उनका हाल-चाल लिया है. दारा को कुश्ती के लिए ‘रुस्तम-ए-हिंद' का खिताब मिला था. उन्होंने 1952 में फिल्म ‘संगदिल' से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा था.
उन्होंने ‘वतन से दूर', ‘रुस्तम-ए-बगदाद', ‘शेर दिल', ‘सिकंदर-ए-आजम', ‘राका', ‘मेरा नाम जोकर', ‘धरम करम' और ‘मर्द' सहित कई अन्य फिल्मों में अभिनय किया. उन्होंने अंतिम बार 2007 में आई ‘जब वी मेट' में अभिनय किया था. उन्होंने टीवी धारावाहिकों में भी अभिनय किया. ‘रामायण' में निभाई उनकी हनुमान की भूमिका ने उन्हें काफी लोकप्रियता दिलाई थी.
500 कुश्तियों में से एक भी नहीं हारे पहलवान दारा सिंह
दारा सिंह रंधावा ने 19 नवंबर 1928 को अमृतसर के धर्मूचाक में पंजाब के एक जट सरदार परिवार में जन्म लिया. बचपन अपने फार्म पर काम करते-करते गुजर गया, जिसके बाद ऊंचे कद मजबूत काठी को देखते हुए उन्हें कुश्ती लड़ने की प्रेरणा मिलती रही.
दारा सिंह ने अखाड़े में पहलवानी सीखी. उस दौर में दारा सिंह को राजा महाराजाओं की ओर कुश्ती लड़ने का न्यौता मिला करता था. हाटों और मेलों में भी कुश्ती की और कई पहलवानों को पटखनी दी. यही नहीं अमेरिका के भी कई पहलवानों को चित किया.
दारा सिंह ने सिंगापुर, मलेशिया कॉमनवेल्थ देशों में जीत दर्ज की. अब तक लड़ी कुल 500 कुश्तियों में से दारा सिंह एक भी नहीं हारे, जिसकी बदौलत उनका नाम ऑब्जरवर न्यूजलेटर हॉल ऑफ फेम में दर्ज है.
1960-1970 के दबंग दारा सिंह
आज जितनी तालियां सलमान खान अपनी शर्ट उतारकर बटोरते हैं उससे कहीं ज्यादा तालियां और सीटियां बॉलीवुड के इस ओरिजिनल दबंग दारा सिंह ने 60 के दशक में बटोरी हैं.
सच कहा जाए तो पर्दे पर शर्ट उतारकर बेयर चेस्ट होने का ट्रेंड दारा सिंह ने ही बॉलीवुड में शुरू किया. कई हिंदी फिल्में कीं दारा सिंह ने कई हिंदी फिल्मों का निर्माण किया और उसमें खुद हीरो रहे. बॉलीवुड हसीना मुमताज को तोहफा दारा सिंह ने ही दिया और उनके साथ 16 फिल्मों में काम किया.
इसके बाद दारा सिंह ने कुछ और सीरियल्स में खास भूमिकाएं निभाईं. लेकिन कुछ साल पहले आई सुपरहिट फिल्में 'कल हो न हो' और 'जब वी मेट' में उनका छोटा सा किरदार बेहद असरदार रहा और उन्होंने एक बार फिर पर्दे पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई.
टीवी का ‘हनुमान’
1980-90 के दशक के बीच दारा सिंह ने सिनेमा से टीवी का रुख किया और हनुमान बनकर दर्शकों के दिलों में बस गए. टीवी पर हनुमान के रूप में देखकर दर्शक उनकी भक्ति में लीन हो जाते थे. उन्हें एक पल के लिए भी ये अहसास नहीं हुआ कि टीवी पर दिखने वाला हनुमान दरअसल एक पहलवान है.
साल 2003-2009 के बीच दारा सिंह को राज्य सभा की सदस्यता के लिए भाजपा की ओर से नामांकित किया गया. एक सफल पहलवान, एक सफल अभिनेता, निर्देशक और निर्माता के तौर पर दारा सिंह ने अपने जीवन में बहुत कुछ पाया और साथ ही देश का गौरव बढ़ाया.
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