संभावना
डायोजनेस एक अद्भुत एवं आनंद में मतवाले रहने वाले भिक्षुक थे, वे ग्रीस में एक नदी किनारे रहते थे।
![]() जग्गी वासुदेव |
किसी ने उन्हें एक सुंदर भिक्षापात्र दिया था और वे सिर्फ एक लंगोट पहनते थे। वे मंदिरों के द्वारों पर भिक्षा मांगते थे और जो भोजन उन्हें मिलता था, वही खाते थे। एक दिन, वे अपना भोजन खत्म करके नदी की ओर जा रहे थे, तभी एक कुत्ता उनसे आगे निकला और दौड़कर नदी में गया, थोड़ा तैरा, फिर रेत पर आया और खुशी से लोटने लगा।
उन्होंने यह देखा और सोचने लगे, ‘हे भगवान! मेरी जिन्दगी तो कुत्ते से भी बदतर है’! वे पहले ही आनंदित थे, मगर वे कह रहे थे कि उनका जीवन कुत्ते से भी बदतर है क्योंकि कई बार उन्हें लगता था कि वे बस नदी में कूद जाएं पर उन्हें अपने लंगोट के भीग जाने और भिक्षापात्र के खो जाने की चिंता सताए रहती थी। उस दिन उन्होंने अपना भिक्षापात्र और लंगोट फेंक दिया और पूरी तरह नग्न अवस्था में रहने लगे।
एक दिन, जब वे आनंदित अवस्था में नदी किनारे लेटे हुए थे, तभी सकिंदर उधर से गुजरा। सकिंदर को ‘सकिंदर महान’ कहा जाता है। मैं उसको एक तीसरा नाम देना चाहूंगा ‘सकिंदर महामूर्ख’। क्योंकि वह ऐसा शख्स था जिसने जीवन को बर्बाद किया-अपना भी और दूसरे लोगों का भी। उसने सोलह साल की उम्र में युद्ध करना शुरू कर दिया था। अगले सोलह साल तक वह बिना रु के लगातार लड़ता रहा, और इस दौरान रास्ते में आने वाले हजारों लोगों का कत्ल करता चला गया। बत्तीस साल की उम्र में वह बहुत दयनीय हालत में मरा क्योंकि वह सिर्फ आधी दुनिया को जीत पाया था, बाकी आधी दुनिया अब भी बची थी।
सिर्फ एक महामूर्ख ही इस तरह सोलह साल तक लड़ सकता है। इतिहास की किताबों ने हमेशा बताया है कि सकिंदर बहुत साहसी था। फिर भी सकिंदर ने स्वीकार किया कि उसमें वह करने का साहस नहीं था जो डायोजनेस कर रहे थे। तो सकिंदर ने जवाब दिया, ‘मैं अगले जन्म में तुम्हारे साथ आऊंगा’। उसने अगले जन्म तक के लिए उसे टाल दिया। अगले जन्म में, कौन जानता है कि वह क्या बना हो सकता है। कहीं वह कॉकरोच बन गया हो। आप इंसान के रूप में एक संभावना के साथ आए हैं। अगर आप उसे गंवा दें और सोचें कि आप अगली बार उसे कर लेंगे, तो अगली बार आखिर, किसने देखा है?
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