औरंगजेब की कब्र पर अनावश्यक विवाद
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता भैया जी जोशी का औरंगजेब की कब्र से संबंधित बयान महत्त्वपूर्ण है और इसके विशिष्ट मायने भी हैं।
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उन्होंने कहा है कि इस विषय को अनावश्यक रूप से उठाया गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी विवाद को उठाने की जबरिया कोशिश को निर्थक बताते हुए कहा है कि औरंगजेब की कब्र एक संरक्षित स्मारक है इसलिए इसे तोड़ने या हटाने का कोई अचित नहीं है, लेकिन औरंगजेब जैसे संप्रदायवादी कट्टर शासक का महिमामंडन सहन नहीं किया जाएगा। इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत भी कह चुके हैं कि हर मस्जिद के नीचे मंदिर तलाशना उचित नहीं है।
अगर संघ प्रमुख और संघ के वरिष्ठ नेता की ओर से इस तरह के बयान आते हैं तो वे अकारण नहीं है। संघ एक संजीदा, लक्ष्य बद्ध और दूरगामी संकल्पों वाला हिन्दू संगठन है जिसकी कार्यप्रणाली और वैचारिक अभिव्यक्ति में उच्छृंखलता, अभद्रता या मर्यादाविहीनता लक्षित नहीं होते। उसकी निष्ठा हिन्दुओं को विशेष लक्ष्य के प्रति सचेत बनाकर संगठनबद्ध करके भारतीय राष्ट्र के उस सांस्कृतिक ढांचे में डालना है जिसे वह राजनीतिक तौर पर भारतीय संस्कृति के नाम से अभिहित करता है।
उसका एक बड़ा लक्ष्य भारतीय हिन्दुओं को क्षुद्र मतभेद भुलाकर विराट हिन्दू जाति के रूप में संगठित करना है जिससे उसे वांछित राजनीतिक शक्ति प्राप्त हो, लेकिन जब हिन्दुओं को संघ से इतर संगठन जिन्हें प्राय: संघ का अनुषांगिक संगठन कहा जाता है, अप्रत्याशित घटनाओं को अंजाम देते हैं, अनावश्यक विभाग खड़ा करते हैं। यानी नफरती बयान देते हैं तो ये तत्काल ही संघ की बदनामी का कारण बन जाते हैं और संघ की आलोचनाओं के घेरे में आ जाता है जिससे उसके भविष्यगामी उद्देश्य में बाधा पहुंचती है।
इसलिए संघ चाहता है कि हिन्दू संगठन या हिन्दू समूह ऐसे विवादों को जन्म न दें जिससे सामाजिक या सांप्रदायिक वैमनस्य बढ़ता हो, कानूनी संकट खड़ा होता हो और इन्हें लेकर संघ या भाजपा को सफाई देनी पड़ती हो। संघ इसीलिए समय-समय पर फुटकर हिन्दू समूहों की आलोचना करता है। वैसे भी यह संघ की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस तरह के समूहों को नियंत्रण में रखे और उन्हें कानून-व्यवस्था विरोधी तत्वों के रूप में उभरने न दे।
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