I.N.D.I.A. गठबंधन के अध्यक्ष बनाए जाने के बाद क्या
अठाइस विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस-‘इंडिया’-का अध्यक्ष बनाए जाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नाम पर शनिवार को डिजिटल माध्यम से हुई बैठक में आम सहमति बन गई।
![]() कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे |
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी -TMC), उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता बैठक में शामिल नहीं हुए। बैठक में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को विपक्षी गठबंधन के संयोजक बनाए जाने के प्रस्ताव पर अंतिम फैसला न हो सका। बताया गया है कि नीतीश किसी अन्य को इस पद पर देखना चाहते हैं।
बहरहाल, ‘इंडिया’ का अध्यक्ष चुने जाने के लिए हुई आभासी बैठक गठबंधन के घटक दलों के नेताओं के बीच एकता को लेकर कोई सकारात्मक संदेश नहीं निकल पाया। लगा कि बहुत कुछ है, जो अनसुलझा है और समय आने पर विकराल असहमति का रूप अख्तियार कर सकता है।
नीतीश को जब गठबंधन का संयोजक बनाए जाने का प्रस्ताव आया था, तो उन्होंने इसे स्वीकार करने की बजाय प्रस्ताव रखा कि घटक दलों के प्रमुखों की एक टीम गठित की जाए जो संयोजक का दायित्व अच्छे से निभा सकती है। मतैक्य की स्थिति को फिलहाल संयोजक के मसले को कुछ समय के लिए टाल दिया गया है, लेकिन इस प्रकार की टाल-मटोली से अच्छा संदेश नहीं निकलता। दो टूक निर्णय लेकर आगे बढ़ने का समय निकला जा रहा है।
इसलिए गठबंधन के घटक दलों किसी एक चेहरे पर सर्वसम्मति बनाने पर समय गंवाने की बजाय साझा कार्यक्रम पर सहमति बनाने की जरूरत है, और एक ऐसे नेता के नेतृत्व में लामबंद हो जाने की जरूरत है, जो सभी घटक दलों को साथ लेकर बढ़ सके। 1977 याद किया जा सकता है, जब विपक्ष ने मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश नहीं किया गया था।
समूचा विपक्ष एकजुट होकर चुनाव लड़ा और परिणाम आने के बाद सर्वसम्मति से अपना नेता चुनने में सफल रहा। दरअसल, न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर मजबूत सहमति ज्यादा महत्त्वूपर्ण होती है, और बाकी बातें गौण। वरना नेताओं की महत्त्वाकांक्षाएं उजागर होने लगती हैं, और एकजुटता संबंधी प्रयासों को पलीता लग जाता है।
अब संयोजक का दायित्व को कमेटी निभाए या कोई नेता इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए। मल्लिकाजरुन खरगे जैसे वरिष्ठ अनुभवी नेता यकीनन गठबंधन के नेता पद की जिम्मेदारी के मामले में खरा उतरेंगे।
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