केजरीवाल के घर पर विधायकों ने की चीफ सेक्रेटरी से बदसलूकी, हड़ताल पर अधिकारी

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दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी अंशु प्रकाश के साथ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर कथित रूप से बदसलूकी का मामला सामने आया है.

बताया जा रहा है कि केजरीवाल की मौजूदगी में उनके सरकारी निवास पर कल देर रात आम आदमी पार्टी के दो विधायकों ने अंशु प्रकाश के साथ बदसलूकी और हाथापाई की. वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय ने इन आरोपों को निराधार और अजीब बताकर खारिज किया है.

एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि प्रकाश को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अप्रकाशित विज्ञापनों के मुद्दे पर बातचीत करने के लिए अपने आवास पर बुलाया था. हालांकि पार्टी का कहना है कि उन्हें राशन पर चर्चा करने के लिए बुलाया गया था.

नाम गुप्त रखने की शर्त पर एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने बताया, ‘‘कल रात बैठक के दौरान तीखी बहस हो गई थी. तर्क-वितर्क के दौरान दो-तीन आप विधायकों ने उनके साथ हाथापाई की, इसमें चीफ सेक्रेटरी का चश्मा भी टूट गया था.’’

उन्होंने बताया कि घटना के बाद चीफ सेक्रेटरी ने उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात की और उन्हें घटना की जानकारी दी.

आईएएस अधिकारी संघ ने आज बैजल से मुलाकात की और उनके सामने यह मुद्दा उठाया.

दिल्ली प्रशासनिक अधीनस्थ सेवाओें (डीएएसएस) के अधिकारियों ने प्रकाश के साथ विधायकों की बदसलूकी के विरोध में काम नहीं करने का ऐलान किया है.

डीएएसएस के अध्यक्ष डीएन सिंह ने कहा, हम चीफ सेक्रेटरी के साथ हैं और जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता काम पर नहीं लौटेंगे और तुरंत प्रभाव से हड़ताल पर जा रहे हैं.

सिंह ने कहा कि उपराज्यपाल अनिल बैजल से इस घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है. यह संवैधानिक संकट जैसा है और ऐसी घटना पिछले कुछ वर्षों में नहीं देखी गई.

वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘मारपीट के आरोप पूरी तरह विचित्र और निराधार हैं.’’

केजरीवाल इस्तीफा दें: माकन

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने चीफ सेक्रेटरी अंशु प्रकाश के साथ बदसलूकी की कड़ी निंदा करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से इस्तीफे की मांग की है.

माकन ने आज कहा कि यह घटना मुख्यमंत्री के सामने हुई है. इसकी जितनी निंदा की जाए कम है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रशासनिक और संवैधानिक संकट है. मुख्यमंत्री के सामने यह घटना हुई है और उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. मुख्यमंत्री को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए.