मानव तस्करी पर होगी 10 साल की सजा!

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सरकार मानव तस्करी पर कड़ी सजा वाले कानून के लिए संसद के इसी सत्र में विधेयक लाएगी. अधिकतम 10 साल की सजा और संपत्ति जब्त करने वाले इस विधेयक के मसौदे को कानून मंत्रालय ने अपनी मंजूरी दे दी है. 

इसमें नशीली दवाओं का सेवन कराकर नावालिग का यौन शोषण कराने के लिए उनकी तस्करी करने पर भी कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है.

महिला और बाल विकास मंत्रालय मानव तस्करी पर रोक और पुनर्वास वाले इस विधेयक पर इसलिए जोर दे रहा है, क्योंकि अभी बच्चों और उनमें भी नाबालिग लड़कियों की मानव तस्करी के मामले सही तरीके से रिपोर्ट नहीं किए जाते हैं. दूसरा जिन कानूनों के तहत मामले दर्ज होते हैं, वो अधिक प्रभावी भी नहीं हैं. प्रस्तावित नया कानून अधिक कड़ा है, जिसमें न्यूनतम 7 साल की सजा की बात कही गई है, जिसे बढ़ाकर 10 साल तक भी किया जा सकता है. इसमें एक लाख रुपए तक जुर्माना और आरोपी की संपत्ति अटैच करने का भी प्रावधान रखा गया है.

खास पहलू ये भी है कि मानव तस्करी का मामला सामने आने पर 24 घंटे के भीतर उसे रिपोर्ट करना अनिवार्य बनाया गया है. इस तरह के मामलों की सुनवाई के लिए न सिर्फ स्पेशल कोर्ट होंगे, बल्कि विशेष जांच अधिकारी भी नियुक्त किए जाएंगे. मानव तस्करी के मामलों के लिए राज्य और जिला स्तर पर मानव तस्करी निरोधक कमेटियां भी बनेंगी. इसके साथ-साथ वेलफेयर अधिकारियों की भी नियुक्ति की जाएगी जो पीड़ित को संरक्षण प्रदान करेंगे.

महिला और बाल विकास मंत्रालय के सचिव राकेश श्रीवास्तव ने इस बात की पुष्टि की है कि मानव तस्करी निरोधक विधेयक के मसौदे को कानून मंत्रालय की मंजूरी मिल गई है. उन्होंने कहा कि संसद के बजट सत्र के दूसरे हिस्से में इस विधेयक को पेश किए जाने की पूरी संभावना है. सचिव ने कहा कि मंशा ये ही है कि मानव तस्करी के मामले चाहे देशी व्यक्तियों से जुड़े हुए हों या फिर विदेशियों से जुड़े हों, सारे रिपोर्ट होने चाहिए.