भाजपा राष्ट्रभक्ति से रंगी शत प्रतिशत लोकतांत्रिक पार्टी : मोदी

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जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी को आजादी के बाद देश में हुए सभी प्रमुख जनांदोलनों का अगुआ करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि उनकी पार्टी ‘राष्ट्रभक्ति से रंगी हुई शत प्रतिशत लोकतांत्रिक पार्टी’ है.

आधुनिक सुविधाओं से लैस पार्टी मुख्यालय का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने यहां कहा कि आजादी के बाद देश में जितने भी आंदोलन हुए हैं, उन सारे आंदोलनों का नेतृत्व जनसंघ और भाजपा ने किया जिसका उन्हें बहुत गर्व है. उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी राष्ट्रभक्ति से रंगी है और राष्ट्रहित के लिए मरने मिटने वाले असंख्य कार्यकर्ताओं के त्याग एवं तपस्या से इस पार्टी की रचना हुई है. 
      
मोदी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और दिवंगत सुंदर सिंह भंडारी के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि श्री आडवाणी हमेशा संगठनात्मक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का अध्ययन करते रहते थे और श्री भंडारी भी हमेशा से कोई समझौता किए बिना संविधान के अनुसार पार्टी कैसे चले और सदस्यता कैसे बढ़े, प्रक्रियाएं कैसी हों, इसकी चिंता करते थे. 
 
उन्होंने कहा, ‘इन्हीं चीजों के कारण भाजपा का आज का ‘पिण्ड शत प्रतिशत लोकतांत्रिक पिण्ड है.’ लोकतां के लिए अलग अलग क्षेत्रों में वहां के लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप काम करने की जरूरत होती है. सोचने, काम करने, निर्णय लेने और उसे लागू करने में लोकतांत्र की शिक्षा दीक्षा हमें मिली है. उन्होंने कहा कि आज जब जनता ने हमें सत्ता के माध्यम से सेवा का मौका दिया है तब ये लोकतांत्रिक संस्कार बहुत काम आ रहे हैं. सबको साथ लेकर चलने का प्रयास कर रहे हैं.

उन्होंने गठबंधन की राजनीति में भाजपा के योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि स्वार्थवश राजनीतिक दलों का एका होना अलग बात है, लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों और क्षेत्रीय अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लक्ष्य के साथ पार्टियों को साथ लेकर चलना दूसरी बात. इस मामले में भी भाजपा ने एक अलग मुकाम हासिल किया है. 



उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से साथियों को साथ लेकर गठबंधन में क्षेत्रीय आकांक्षाओं के साथ संतुलन कायम करते हुए अलग अलग दलों की ताकत को जोड़ते हुए देश की आशाओं एवं आकांक्षाओं को कैसे पूरा किया जा सकता है, यह प्रयोग भी भाजपा की श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने दिखाया. इसका मूल कारण हमारी सोच, विचार, संस्कार रग रग में लोकतंत्र हैं और उसी के कारण सबके साथ चलने में हम लोग यथासंभव सफलता पूर्वक आगे बढ़ रहे हैं.