'उम्मीदवार की पत्नी, आश्रितों की संपत्ति का ब्योरा देना अनिवार्य'

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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव सुधार की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए चुनाव नामांकन पत्र में उम्मीदवार के अलावा उसकी पत्नी और आश्रितों के आय के स्रोतों और संपत्तियों की जानकारी साझा करना अनिवार्य बना दिया है. 

न्यायमूर्ति जस्ती चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति एस ए अब्दुल नजीर की पीठ ने गैर-सरकारी संगठन लोक प्रहरी की जनहित याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया.

पीठ की ओर से फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा, याचिका स्वीकार की जाती है, लेकिन जिन अनुरोध के लिए कानून में संशोधन की आवश्यकता होगी, उसे मंजूर नहीं किया जा सकता, क्योंकि कानून में संशोधन का काम संसद का है.

लोक प्रहरी ने माननीयों को आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने से रोकने के लिए कदम उठाये जाने की याचिका में मांग की थी.

याचिकाकर्ता की मांग थी कि उम्मीदवारों के अलावा उनकी पत्नियों और आश्रितों की आय के स्रोतों और संपत्तियों की जानकारी नामांकन पत्र में उपलब्ध कराने को अनिवार्य बनाया जाये. कोर्ट ने याचिका की विस्तृत सुनवाई के बाद बीते साल 12 सितम्बर को फैसला सुरक्षित रख लिया था.

सुनवाई के क्रम में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने हलफनामा दायर करके सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया था कि आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक की संपत्ति अर्जित करने वाले कुछ सांसदों और विधायकों के खिलाफ जांच जारी है.

याचिकाकर्ता ने सरकारी योजनाओं में ठेका लेने वाले या सरकारी कंपनियों से आर्थिक तौर पर जुड़े माननीयों को अयोग्य ठहराये जाने संबंधी कानून संशोधन के लिए संसद को निर्देश देने का भी आग्रह कोर्ट से किया था. कोर्ट ने इसे संसद पर छोड़ दिया है.