रोहानी की भारत यात्रा से पाक की नींद उड़ी

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ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक के एजेंडे में चाबहार पोर्ट के अगले चरण और आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरना सबसे ऊपर होगा. 

यह पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. चाबहार पोर्ट के जरिए पाकिस्तान में प्रवेश किए बिना भारत अफगानिस्तान के साथ ही मध्य एशिया के देशों से सीधा संपर्क जोड़ सकेगा. 

कुलभूषण जाधव के मुद्दे पर भी पाक को घेरने में ईरान के राष्ट्रपति की यह यात्रा भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी. भारत का कहना है कि जाधव का ईरान से अपहरण किया गया है. इस मुद्दे पर ईरान पहले भी भारत के पक्ष पर मुहर लगा चुका है. 

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति रोहानी के बीच होनेवाली बातचीत में चाबहार पोर्ट का मुद्दा सबसे ऊपर होगा. यह देश के लिए सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अफगानिस्तान में भारत की सीधी पहुंच को आसान बनाने बाला है. एक तरीके से यह पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित ग्वादर पोर्ट के काफी नजदीक है . ग्वादर पोर्ट चीन की मदद से तैयार हो रहा है. 

कूटनयिक दृष्टि से देखा जाए तो चाबहार पोर्ट के जरिये अफगानिस्तान में इस सीधी पहुंच के दूरगामी परिणाम होंगे. चाबहार पोर्ट ने पहले से ही पाकिस्तान की नींद उड़ा रखी है. रोहानी की इस यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंधों का नया दौर शुरू होगा. दोनों नेताओं के बीच बातचीत में चाबहार पोर्ट के अगले चरण को लेकर सहमति बनाने पर चर्चा होगी और इसे अंतिम रूप दिया जाएगा. 

रोहानी का दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पहले इस्रइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू भारत आए उसके बाद प्रधानमंत्री फिलीस्तीन में रामल्ला गये और अब ईरान के राष्ट्रपति भारत में है. जो यह साबित करता है कि भारत की विदेश नीति पश्चिम एशिया में संतुलन बनाये रखने की है. 

भारत दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि रणनीतिक रूप से इस्रइल , फिलीस्तीन और ईरान सभी उसके लिये महत्वपूर्ण है और उसका झुकाव किसी विशेष देश के प्रति नहीं है. 

उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी अमेरिका के दवाब के बावजूद भारत ने ईरान के साथ अपने रिश्तों पर आंच नहीं आने दी थी. विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार पाक प्रायोजित आतंकवाद के मुद्दे पर भी दोनों नेता बात करेंगे.