इस औद्योगिक वृद्धि पर खुशी मनाएं या गम

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देश की औद्योगिक प्रगति हर किसी के लिए खुशी लेकर आती है लेकिन केंद्रीय सांख्यिकी आयोग ने औद्योगिक विकास के जो आंकड़े जारी किये है, उसमें एक गंभीर चिंता की झलक है.

7.1 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी औद्योगिक प्रगति में सबसे तेजी पाचन, एसिडिटी, उच्च रक्तचाप और केलोस्ट्रोल बीमारी से लड़ने की दवाइयों के उत्पादन में वृद्धि का योगदान है.

यानि देश में इन बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं. सीएसओ ने इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल  प्रोडक्शन (आईआईपी) के आंकड़े जारी किये हैं. ये आंकड़े 2016 दिसम्बर और 2017 दिसम्बर के हैं, ताकि पिछले साल और इस साल में तुलना की जा सके.

सीएसओं के आंकड़ों के मुताबिक गत दिसम्बर में दवा बनाने की कंपनियों, मेडिकल कैमिकल और बोटेनिकल उत्पाद में 33.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इनमें खून को पतला करने, कोलेस्ट्रोल और तनाव व उच्च रक्तचाप कम करने वाली दवाइयों के उत्पादन में 250 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

जबकि पाचन, एसिडिटी और 88 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में पाचन, एसिडिटी और अल्सर जैसे पीपीआई की दवाइयों के उत्पादन का योगदान मात्र 0.22 प्रतिशत है, लेकिन इसके उत्पादन में हिस्सेदारी 2.22 प्रतिशत हो गयी है जो सबसे अधिक है.

यानि देश में सीमेंट, बिजली, डीजल, दोपहिया वाहनों के उत्पादन से ज्यादा पाचन और  पेट संबधी बीमारियों के दवाइयों का उत्पादन बढ़ रहा है.