Teachers Day 2018: जानिए 5 सितंबर को ही क्यों मनाते हैं शिक्षक दिवस

समय लाइव डेस्क, नई दिल्ली

भारतीय संस्कृति में तो गुरु को ईश्वर का स्थान दिया गया है और इसलिए दुनिया भर के कई देशों में शिक्षकों को उनके योगदान के लिए आभार जताने का एक दिन निश्चित है. भारत में शिक्षक दिवस का आयोजन करके हम पूर्व राष्ट्रपति, एक महान शिक्षक, राजनीतिज्ञ एवं दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भी याद करते हैं जिनका जन्म 5 सितंबर को ही हुआ था. इसी कारण तबसे आज तक 5 सितम्बर को सारे देश में उनका जन्म दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है.

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर सन् 1888 को जन्म तमिलनाडु के तिरुतनी गॉव में हुआ था. वे भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत एक प्रख्यात शिक्षाविद, महान दार्शनिक, जननायक, उत्कृष्ट वक्ता और एक आस्थावान हिन्दू विचारक थे. वे स्वतन्त्र भारत के दूसरे राष्ट्रपति थे. इससे पूर्व वे उपराष्ट्रपति भी रहे.

राजनीति में आने से पूर्व उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण 40 वर्ष शिक्षक के रूप में व्यतीत किये थे. उनमें एक आदर्श शिक्षक के सारे गुण मौजूद थे. शिक्षा और राजनीति में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए राधाकृष्णन को वर्ष 1954 में भारत के सर्वोच्‍च सम्‍मान भारत रत्‍न से नवाजा गया था. उन्होंने अपना जन्म दिन अपने व्यक्तिगत नाम से नहीं अपितु सम्पूर्ण शिक्षक बिरादरी को सम्मानित किये जाने के उद्देश्य से शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा व्यक्त की थी.

सन्‌ 1962 में जब वे राष्ट्रपति बने थे, तब कुछ शिष्य और प्रशंसक उनके पास गये और उन्होँने उनसे निवेदन किया कि वे उनके जन्म दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाना चाहते हैं. उन्होंने कहा- "मेरे जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने से निश्चय ही मैं अपने को गौरवान्वित अनुभव करूँगा." तभी से 5 सितंबर देश भर में शिक्षक दिवस या Teachers Day के रूप में मनाया जा रहा है.