SC/ST मामला : एकतरफा बयान से किसी को जेल नहीं भेजा जा सकता

सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) अधिनियम पर अपने मार्च के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि संसद भी बिना उचित प्रक्रिया के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की अनुमति नहीं दे सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने शिकायतों की पहले जांच का आदेश देकर निदरेष लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा की है। केंद्र ने फैसले का यह कहते हुए विरोध किया कि अदालतें संसद द्वारा बनाए गए कानून के किसी प्रावधान को हटाने या बदलने का आदेश नहीं दे सकती हैं।

जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और उदय उमेश ललित की बेंच ने कहा कि अगर हम एकतरफा बयानों के आधार पर किसी निदरेष को सलाखों के पीछे भेजने की अनुमति देते हैं तो हम सभ्य समाज में नहीं रह रहे हैं। बेंच ने मामले पर सुनवाई ग्रीष्मावकाश तक के लिए स्थगित कर दी और कहा कि वह विस्तार से सभी संबंधित पक्षों को सुनेगी।

बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस गोयल इस साल छह जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वह दो जुलाई को ग्रीष्मावकाश के बाद अदालत के खुलने के कुछ ही दिनों के बाद सेवानिवृत्त हो जाएंगे। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कई फैसले हैं जो कहते हैं कि संविधान के अनुच्छेद  (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) पर हर प्रावधान में विचार किया जाना चाहिए। अनुच्छेद  से संसद भी छेड़छाड़ नहीं कर सकती है। हमारा संविधान भी किसी व्यक्ति की बिना प्रक्रिया के गिरफ्तारी की अनुमति नहीं देता है।

केंद्र की ओर से अटर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला दिया और कहा कि अदालतें संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के प्रावधानों में कमी को पूरा करने के लिए उसे हटा या बदल नहीं सकती हैं। बेंच ने कहा कि  मार्च के फैसले में हमने इस अदालत के पूर्व के फैसलों पर विचार किया है, जो कहते है कि अनुच्छेद  की रक्षा की जानी चाहिए। बिना जांच के एकतरफा बयान के आधार पर हम कैसे किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी की अनुमति दे सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को किसी शिकायत पर बिना उसकी जांच किए जेल में भेजा जाता है तो उसके मौलिक अधिकारों की रक्षा नहीं की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समय के अभाव की वजह से दलीलें पूरी नहीं की जा सकती हैं और मामले की सुनवाई ग्रीष्मावकाश तक के लिए स्थगित की जाती है। बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री सुनवाई की अगली तारीख बताएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने  मार्च के फैसले में एससी-एसटी अधिनियम के तहत स्वत: गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। कुछ लोगों का मानना था कि इसके जरिए एससी-एसटी कानून के प्रावधानों को कमजोर किया गया है।