RBI ने बढ़ाई ब्याज दर, अब बैंको से कर्ज लेना पड़ेगा मंहगा

वार्ता, मुंबई

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति ने बढ़ती महँगाई - विशेषकर ईंधनों की कीमतों में तेजी - के मद्देनजर साढ़े चार साल बाद नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है।

मुख्य नीतिगत रेपो रेट छह प्रतिशत से बढ़ाकर 6.25 प्रतिशत कर दी गयी है। इससे बैंक ऋण महँगा कर सकते हैं जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए आवास और वाहन ऋण की ईएमआई के साथ उद्योगों के लिए भी पूँजी महँगी हो सकती है।

आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल ने समिति की बैठक के बाद यहाँ बताया कि रेपो दर के अनुरूप रिवर्स रेपो दर भी 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर छह प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फसिलिटी दर तथा बैंक दर बढ़ाकर 6.50 प्रतिशत कर दिये गये हैं। हालाँकि, समिति ने अपना रुख निरपेक्ष बनाये रखने की घोषणा की है।

छह सदस्यीय समिति ने नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का फैसला सर्वसम्मति से किया। इससे पहले आखिरी बार जनवरी 2014 में रेपो दर बढ़ाई गयी थी जब इसे 7.75 प्रतिशत से आठ प्रतिशत किया गया था।

आरबीआई ने अपने बयान में कहा है कि चालू वित्त वर्ष की अप्रैल में हुई पहली द्विमासिक समीक्षा में उसने महँगाई बढ़ने को लेकर जो आशंकाएँ जाहिर की थीं वे सही साबित हुई हैं। भारतीय बास्केट के लिए कच्चे तेल की कीमतों के दाम उस समय से अब तक 12 प्रतिशत बढ़ चुके हैं जो उम्मीद से ज्यादा तथा तेजी से बढ़ी है। हाल के दिनों में कच्चा तेल कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव हुआ है तथा इससे भविष्य में मुद्रास्फीति को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है।

समिति ने कहा है कि वैिक वित्तीय बाजार में बनी परिस्थितियों से भी अनिश्चितता बढ़ी है। इसके अलावा आने वाले समय में आवासीय मुदास्फीति बढ़ने की भी आशंका है। कई राज्य सरकारों द्वारा आवास भत्ता में देर से बढ़ोतरी करने से मुद्रास्फीति और बढ़ सकती है।  उसने कहा है कि मध्यम अवधि में खुदरा महँगाई को चार प्रतिशत के करीब रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

महँगाई के बारे में बयान में कहा गया है कि अप्रैल के उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों और ईंधन वर्गों के अलावा अन्य वर्गों की महँगाई दर भी 0.80 प्रतिशत बढ़ी जो इस मद में बन रहे दबाव को दर्शाता है। पिछले कुछ महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति दर कम रही है तथा आम तौर पर गर्मियों में कीमतों में होने वाली तेजी इस बार देर से देखी जा रही है।

समिति ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में महँगाई दर 4.7 प्रतिशत रहने का पूर्वानुमान जताया है जबकि दूसरी छमाही के लिए खुदरा महँगाई का अनुमान 4.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.6 प्रतिशत कर दिया है।

चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर का विकास अनुमान 7.4 प्रतिशत स्थिर रखा गया है।

समिति के बयान में कहा गया है कि अनाजों और बागवानी के रिकॉर्ड उत्पादन के दम पर आपूर्ति के मोच्रे पर कृषि तथा इससे जुड़ी गतिविधियों का अनुमान बढ़ाया गया है। मौसम विभाग ने इस साल मानसून सामान्य रहने की घोषणा की है। यह कृषि क्षेत्र के लिए अच्छा संकेत है।

औद्योगिक विकास में मजबूती देखी गयी है। विनिर्माण संयाोंं में क्षमता के इस्तेमाल में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल में आठ बुनियादी उद्योगों का उत्पादन बढ़ा है। अप्रैल में निर्यात बढ़ा जबकि आयात में अपेक्षाकृत कम वृद्धि हुई है।
समिति ने वैश्विक स्तर पर संरक्षणवादी व्यापार नीति को घरेलू अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए खतरा बताया है।

चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक तीन दिन चली। आम तौर पर यह बैठक दो दिन चलती है। समिति के सदस्यों में श्री पटेल के अलावा डॉ. चेतन घाटे, डॉ. पामी दुआ, डॉ. रविन्द्र ढोलकिया, डॉ. माइकल देवब्रत पा और डॉ. विरल आचार्य शामिल हैं। समिति की अगली बैठक 31 जुलाई और एक अगस्त को होगी।