21वें कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत

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आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत हो गई। इन खेलों का परंपरागत ढंग से ब्रिटेन की महारानी क्वीन एलिजावेथ द्वितीय की तरफ से प्रिंस चाल्र्स और उनकी पत्नी कैमिला ने उद्घाटन किया। भारतीय दल की परेड ऑफ नेशंस में रियो ओलंपिक की रजत पदक विजेता पीवी सिंधु ने हाथ में तिरंगा लेकर अगुआई की। इस परेड की अगुआई स्कॉटलैंड के दल ने की क्योंकि चार साल पहले यानी 2014 में ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन हुआ था।

भारत इन खेलों में झोली भरकर पदक लाता रहा है और इस बार भी भारतीय दल से ऐसी ही उम्मीद की जा रही है। भारत ने 1930 में खेल शुरू होने के 80 साल बाद यानी 2010 में इन खेलों का आयोजन किया था। राजधानी दिल्ली में हुए इन खेलों में भारत ने 38 स्वर्ण पदक सहित 101 पदक जीतकर ऑस्ट्रेलिया  के बाद दूसरा स्थान पाकर एक मापदंड  निर्धारित किया था। 2014 में वह न तो इतने पदक जीत सका और पदक तालिका में पांचवें स्थान पर पिछड़ गया।

यह सही है कि भारत ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड को नहीं पछाड़ सकता है। लेकिन वह पिछले खेलों से ज्यादा पदक पाकर तीसरा स्थान भी पा ले तो इसे बड़ी उपलब्धि माना जाएगा। भारत कुश्ती, निशानेबाजी, वेटलिफ्टिंग, मुक्केबाजी और बैडमिंटन में पदक लेता रहा है। इन खेलों में एथलेटिक्स और तैराकी का स्तर बहुत ऊंचा है।

भारत एथलेटिक्स में तो पदक जीतता रहा है पर वह तैराकी में भी ऐसा करे तो प्रदर्शन में चार चांद लग सकते हैं। एथलेटिक्स में इस बार नीरज चोपड़ा, तेजस्विन शंकर, सीमा पूनिया और हिमा दास से पदक की उम्मीद की जा रही है। पुरुष हॉकी में अच्छा प्रदर्शन करने से देश में खुशी की लहर दौड़ जाती है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, पाकिस्तान और मलयेशिया की मौजूदगी में स्वर्ण पदक जीतना तो मुश्किल है पर भारत रजत पदक भी जीत जाता है तो यह प्रदर्शन खुश होने के लिए काफी है।

वहीं महिला टीम को तैयार करने वाले कोच हरेंद्र सिंह को टीम के स्वर्ण पदक तक जीतने का भरोसा है। यह खेल पहलवान सुशील कुमार के लिए भी बहुत महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि वह 2014 के बाद पहली बार किसी मेजर चैंपियनशिप में उतर रहे हैं। वह यदि यहां स्वर्ण पदक जीतते हैं तो उनसे 2020 के टोक्यो ओलंपिक में  तीसरा पदक जीतने की उम्मीद की जा सकती है।