‘टू प्लस टू’ वार्ता के शुरूआती चरण के बाद भारत, अमेरिका ने कॉमकासा पर दस्तखत किये

भाषा/वार्ता, नई दिल्ली

भारत और अमेरिका ने गुरूवार को एक करार पर हस्ताक्षर कर दिये जिस पर लंबे समय से दोनों पक्ष चर्चा कर रहे थे। इस करार के तहत भारतीय सेना को अमेरिका से महत्वपूर्ण एवं एन्क्रिप्टिड (कूट रूप से सुरक्षित) रक्षा प्रौद्योगिकियां मिलेंगी।
    
अधिकारियों ने यहां बताया कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अमेरिकी विदेश मंत्री एम आर पोम्पिओ तथा रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के साथ पहली ‘टू प्लस टू’ वार्ता के बाद ‘संचार, संगतता, सुरक्षा समझौते’ (कम्यूनिकेशन्स कॅम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट.. कॉमकासा) पर हस्ताक्षर किये गये।     

सीओएमसीएएसए (कॉमकासा) करार होने से भारत को अमेरिका से महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियां हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा और अमेरिका तथा भारतीय सशस्त्र बलों के बीच अंतर-सक्रियता के लिए महत्वपूर्ण संचार नेटवर्क तक उसकी पहुंच होगी।     

अधिकारियों ने कहा कि इससे अमेरिका से मंगाये जा रहे रक्षा प्लेटफॉर्मों पर उच्च सुरक्षा वाले अमेरिकी संचार उपकरणों को लगाया जा सकेगा।

इससे पहले जवाहरलाल नेहरु भवन स्थित विदेश मंत्रालय में हो रही  बैठक के पहले करीब एक घंटे और पोम्पियो के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। करीब 11 बजे दोनों देशों के रक्षा मंत्री वहां पहुंचे और इसके साथ ही टू प्लस टू रणनीतिक वार्ता आरंभ हो गयी। इससे पहले चारों मंत्रियों ने एक साथ तस्वीरें खिंचवाईं। बैठक के बाद संयुक्त प्रेस वक्तव्य होगा। बाद में इन मंत्रियों की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात होगी।

दो चरणों में होने वाली इस बैठक में भारत-अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में उच्च प्रौद्योगिकी वाले नवान्वेषण एवं व्यापार का रास्ता खुलने तथा हिन्द-प्रशांत क्षेत्र को समावेशी, सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं सबके लिए समान रूप से खुला बनाने के नये रोडमैप पर चर्चा होने की संभावना है।

भारत हिन्द-प्रशांत क्षेत्र को समावेशी, सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं सबके लिए समान रूप से खुले क्षेत्र के रूप में देखना चाहता है। इसके अलावा आतंकवाद निरोधक कार्रवाई, ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक साझीदारी पर बातचीत होने  की संभावना है। आतंकवाद निरोधक उपायों पर भी चर्चा होगी। चूंकि पोम्पियो भारत के पहले इस्लामाबाद होकर आये हैं। सरकार पाकिस्तान की नयी इमरान खान सरकार के बारे में उनके विचार भी जानना चाहती है।

अमेरिका ने गत वर्ष भारत को प्रमुख रक्षा साझीदार का दर्जा दिया था और इस साल सामरिक प्रौद्योगिक समझौता (एसटीए) 1 का दर्जा दे दिया है जिससे दोहरे उपयोग की प्रौद्योगिकी को भारत को बिना रोक-टोक हस्तांतरित करना संभव हो गया है। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में रक्षा क्षेा में नवान्वेषण और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच रक्षा व्यापार एवं प्रौद्योगिकी पहल को आगे बढ़ाने को लेकर भी बात होगी। इसके अलावा इस्पात एवं अल्युमिनियम आदि पदाथरें पर शुल्क का मुद्दा भी व्यापारिक मसलों में शामिल रहेगा।

संचार सुसंगतता एवं सुरक्षा समझौते (कॉमकासा) के बारे में भी प्रगति होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। अमेरिका ने हाल ही में डाटा सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताओं का समाधान करने का आासन दिया है।

रूस से एस-400 मिसाइल कवच के सौदे, ईरान से तेल आयात और चाबहार बंदरगाह परियोजना को अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे से बाहर रखने के लिए भी बातचीत होगी। बैठक के पहले भारत ने संकेत दे दिए हैं कि इन तीनों मुद्दों पर भारत स्वतां फैसला लेगा क्योंकि इससे उसके आर्थिक सामरिक विकास पर सीधा असर होता है। भारत का कहना है कि अगर अमेरिका हिन्द प्रशांत क्षेा में भारत को सशक्त देखना चाहता है तो उसके हितों का ख्याल रखा जाना चाहिए।