हिन्दू-मुस्लिम छात्रों को अलग बैठाने के मामले में स्कूल प्रभारी निलंबित

सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली


वजीराबाद स्थित नगर निगम के स्कूल में हिन्दू और मुस्लिम बच्चों को अलग-अलग कक्षाओं में बैठाने के मामले में उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) ने  शिक्षा विभाग ने प्रभारी शिक्षक को निलंबित कर दिया है, साथ ही उन पर भारी जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा नगर निगम ने एक जांच समिति गठित की है। उधर उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा कि भाजपा शासित निगम स्कूल में हिंदू-मुस्लिम बच्चों को अलग-अलग कमरों में बैठाने की यह हरकत देश के संविधान के खिलाफ सबसे बड़ी साजिश है। उन्होंने शिक्षा निदेशक को जांच कर शुक्रवार तक रिपोर्ट देने को कहा है।
मीडिया में बुधवार को प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तरी दिल्ली नगर निगम के शिक्षकों के एक वर्ग ने आरोप लगाया है कि वजीराबाद के प्राथमिक स्कूल में हिन्दू और मुस्लिम छात्रों को अलग अलग कक्षाओं में बैठाया जा रहा है।  स्कूल की पहली, दूसरी, तीसरी, चौथी और पांचवी कक्षा के सभी अनुभागों में बच्चों को धर्म के हिसाब से बांटा गया है। इस के साथ ही स्कूल में शिक्षा के अधिकार कानून का भी उल्लंघन किया जा रहा है जिसके तहत  प्राइमरी स्कूल की एक कक्षा के एक सेक्शन में अधिकतम 30 बच्चे पढ़ाने का नियम है। मगर, इस स्कूल के अनेक सेक्शन में 35 से लेकर 49 तक बच्चे पढ़ाए जा रहे हैं।
 उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर आदेश गुप्ता ने बताया कि धर्म के आधार पर बच्चों को अलग- अलग पढ़ाने का मामला गंभीर है । उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर बच्चों को बांटने से संबंधित मामले की जांच कराई जा रही है। इसके लिए शिक्षा निदेशक समेत अधिकारियों की टीम बनाई गई है जो स्कूल जाकर मामले की जांच करेंगे और अपनी रिपोर्ट सौपेंगे। रिपोर्ट में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग के मुताबिक धर्म के आधार पर शिक्षा देने के मामले में वजीराबाद पहुंचे जांच दल ने स्कूली बच्चों की दैनिक हाजिरी और विभिन्न सेक्शन के सभी रजिस्टरों समेत कई अन्य रजिस्टर भी अपने कब्जे में ले लिए हैं जिनकी जांच की जा रही है।
उधर उत्तरी दिल्ली नगर निगम में कांग्रेस दल के नेता मुकेश गोयल ने कहा कि धर्म के नाम पर बच्चों को बांटना कतई मंजूर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वज़ीराबाद स्थित स्कूल के साथ निगम के अन्य स्कूलों में भी बच्चों के धार्मिंक विभाजन मामले की जांच होनी चाहिए ताकि ऐसे सभी स्कूल सामने आ सकें जो बच्चों के मन में नफरत के बीज बो रहे हैं।