हरियाली तीज: जहां पद्म पुष्प कर रहे है भोले का श्रंगार...

वार्ता, महोबा

उत्तर प्रदेश के कई मंदिरों में सावन मास के तीसरे सोमवार और हरियाली तीज के पावन दिवस पर हजारों महिलाओं ,पुरुषों और विशेषकर युवतियों की भारी भीड़ शिवलिंगों पर जलाभिषेक के लिये कतारों में पौराणिक पृथ्वीनाथ मंदिर, दु:ख हरण नाथ मंदिर और अन्य शिवालयों में भोर से लगी रही।

उत्तर प्रदेश का बुंदेलखण्ड अंचल पवित्र सावन मास में इन दिनों भूत भावन भगवान भोले शंकर की पूजा आराधना के लिए कमल पुष्पों की आपूर्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। पानी के अभाव में समूचे क्षेत्र के सूखे की गहरी काली छाया से घिरने के बावजूद यहाँ के सरोवरो में संचित संक्षिप्त जलराशि में अबकी फिर प्रचुर मात्रा में उगे सुंदर पदमपुष्प पूर्व की भांति शिव भक्तों की साधना में सहायक बन रहे है।
      
मानसून के आगमन को दो माह का समय गुजरने के बावजूद पूरा विंध्य अंचल अभी भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है। हर रोज यहां आसमान में काले मेघ उमड़-घुमड़ कर डेरा तो जमा रहे है लेकिन वह भी बगैर बरसे चुपचाप निकल जा रहे है। तालाबोए पोखरों ओर जलाशयों में पानी सिमट चला है लेकिन इनमे इन दिनों चहुँओर बिखरी कुमुद पुष्पो की अनुपम छटा अभिभूत कर रही है।

सरोवरों के स्वच्छ एवं निर्मल जल में उगे कमल पुष्पों के अत्यंत मनोहारी सौंदर्य को निहारने के लिए यहां हर रोज लोगो की भारी भीड़ तो उमड़ ही रही है। साथ ही अब कमल पुष्प, कमल नाल और उसके अति स्वादिष्ट फल कमल गटा की खरीदफरोख्त के लिए महानगरों से आकर बड़ी संख्या में व्यापारियों ने यहां डेरा जमा लिया है।
     
एक अनुमान के मुताबिक बुंदेलखंड के महोबा, झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट और बांदा समेत सभी सातो जिलो में इन दिनों कोई एक सैकड़ा से ऊपर जलाशय कमल पुष्पों से पटे पड़े है। जिन्हें मनमाने तरीके से तोड़ कर उनकी मांग वाले इलाकों में पहुंचाने का क्रम जारी है।

कमल पुष्पो की बिक्री में यहां प्रमुख रूप से ढीमर बिरादरी के लोगो का ही एकाधिकार है। वे मत्स्य आखेट ओर सिंघाड़ा उत्पादन के लिए जलाशयों का पट्टा हासिल कर उसमें स्वत: उग आने वाले कमल पुष्पो को अतिरिक्त लाभ की वस्तु समझ कोड़ी मोल बेंच देते है।
     
आषाढ़ से कार्तिक माह तक मुख्यत: बारिश के मौसम में ही सरोवरों में दिखाई देने वाले कमल पुष्प का देवी देवताओं के पूजा पाठ में विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि यह देवो का सर्वाधिक प्रिय पुष्प है। अपने खास महत्व के चलते ही कमल पुष्प की कीमत तीज त्योहारों पर महानगरों में हजारों रुपये होती है।
     
दीपावली के पर्व में तो इसकी मांग खासी बढ़ जाती है और यह बेहद मूल्यवान हो जाता है। कमल पुष्प को यहां अधिकतम एक रुपये नग में खरीदने वाले मुम्बई,दिल्ली, गुजरात आदि महानगरों के व्यापारी इसकी मांग बढ़ने पर पूरा लाभ उठाते है तथा लाखो रुपये मुनाफा कमाते है।
     
महोबा में पुरातात्विक महत्व के प्राचीन स्थल श्री रामकुंड स्थित उमंगेर महादेव मंदिर के पुजारी शिव किशोर पांडेय ने कमल पुष्प की महिमा बताते हुए कहा कि इसका देवी लक्ष्मी सहित देवो ब्रम्हा, विष्णु तथा महेश से गहरा नाता है।
     
प्राचीन कथा के अनुसार विष्णु देव ने एक बार महादेव की आराधना करते हुए उनका एक हजार कमल पुष्पो से पूजन करने का संकल्प लिया। तब भोलेनाथ ने उनकी परीक्षा लेते हुए अपनी माया से अंतिम पुष्प गायब कर दिया। इस प्रकार विष्णु कुल 999 पुष्प अर्पण के उपरांत शेष एक फूल के लिए काफी परेशान हुए। लेकिन काफी खोजबीन के उपरांतभी पुष्प न मिलनेपर उन्होंने देवाधिदेव शिव को कमल नयन कहलाने वाले अपने एक नेत्र को अर्पित कर पूजन सम्पन्न किया।