सेशेल्स में कूटनीतिक जीत

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सेशेल्स के राष्ट्रपति डैनी फॉरे की भारत यात्रा के दौरान एसम्पशन आइलैंड पर नौसैनिक अड्डा निर्माण पर हुई सहमति ने इसको लेकर पिछले करीब एक महीने से जारी आशंकाएं खत्म हो गई हैं। राष्ट्रपति फोरे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है कि भारत और सेशेल्स ने रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाते हुए एसम्प्शन द्वीप परियोजना पर एक-दूसरे के हितों के अनुरूप मिलकर काम करने पर सहमति जताई है। मोदी की मार्च 2015 की सेशल्स यात्रा के दौरान इस पर सहमति हुई थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों से ऐसी खबरें आ रहीं थीं कि सेशल्स अपने वायदे से मुकर गया है।

सरकार की सहमति का विपक्ष ने विरोध कर दिया है और अब वहां भारत नौसैनिक अड्डा विकसित नहीं कर पाएगा। यह भारत के लिए धक्का पहुंचाने वाली सूचना थी। जाहिर है, उसके बाद से भारतीय कूटनीति तेजी से सक्रिय हुई और उसी की परिणति है यह समझौता। सेशल्स में विरोधियों ने यह प्रचारित किया था कि भारत को एकाधिकार दे दिया गया है और हमारे देश की कोई भूमिका नहीं होगी। इसलिए संयुक्त वक्तव्य के अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि हम एक-दूसरे के अधिकारों की मान्यता के आधार पर असम्पशन आइलैंड परियोजना पर मिलकर काम करने को सहमत हुए हैं।

यह इस मायने में महत्त्वपूर्ण है कि हिन्द महासागर के विशाल क्षेत्र में भारत अपनी सामरिक उपस्थिति बढ़ाने की दिशा में लगातार कोशिशें कर रहा है। पिछले ही महीने इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भी प्रधानमंत्री ने एक व्यापक समुद्री सुरक्षा समझौता किया है। भारत के पास भविष्य को ध्यान में रखते हुए चीन के समानांतर रक्षा उपस्थिति बढ़ाना आवश्यक है।

भारत ने सेशेल्स के साथ संबंध को मजबूत और स्थायी करने के लिए और भी घोषणाएं कीं। सेशेल्स को रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए दस करोड़ डॉलर का ऋण दिया जाएगा। मोदी ने दूसरा डोर्नियर विमान देने का वायदा किया था वह शीघ्र ही सेशेल्स पहुंच जाएगा। इसके अलावा तीन सरकारी ढांचागत परियोजनाओं को विशेष ऋण दिए जाने सहित आपसी सहयोग के छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए। समुद्र आधारित ब्ल्यू इकोनॉमी का पूरा लाभ उठाने की दिशा में संयुक्त रूप से कार्य करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी गई। इस तरह सेशेल्स के साथ संबंधों के नये दौर की शुरु आत हुई है।