सेवानिवृत्त कैप्टन को सात साल की सश्रम कैद

भाषा, नई दिल्ली

दिल्ली की एक अदालत ने 2006 के नौसेना वॉर रूम लीक कांड से जुड़े एक मामले में बुधवार को सेवानिवृत्त कैप्टन सलाम सिंह राठौड़ को सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि राठौड़ किसी नरमी के हकदार नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराध किया है।

सीबीआई की विशेष अदालत के जज एस के अग्रवाल ने सरकारी गोपनीयता कानून (ओएसए) के तहत जासूसी के अपराध के दोषी राठौड़ को सात साल जेल की सजा सुनाते हुए कहा कि उनके पास से बरामद किए गए दस्तावेज रक्षा मंत्रालय के थे और ‘प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शत्रु के लिए उपयोगी’ थे।

इस मामले के एक अन्य आरोपी सेवानिवृत कमांडर जरनैल सिंह कालरा को अदालत ने बरी कर दिया। राठौड़ को सजा सुनाते हुए अदालत ने सरकारी वकील की इस दलील पर विचार किया कि राठौड़ के पास से कई गोपनीय दस्तावेज बरामद किए गए और वह यह नहीं बता सके कि उनके पास वे दस्तावेज कहां से आए।

जज ने कहा कि इस मामले में दोषी की ओर से किया गया अपराध न केवल समाज के खिलाफ था, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ किया गया अपराध था। दोषी के पास से बरामद दस्तावेज भारत के रक्षा विभाग से जुड़े हैं और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से दुश्मन के लिए उपयोगी हैं।’ जज ने यह भी कहा कि दोषी को सजा देना दूसरों के लिए एक सीख है ताकि कोई भी ऐसे अपराध को अंजाम नहीं दे।