सुप्रीम हैं सीजेआई

सुप्रीम हैं सीजेआई, सुप्रीम हैं सीजेआई

निस्संदेह, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह साफ करना कि न्यायालय में पीठों का गठन और न्यायाधीशों का कार्य आवंटन मुख्य न्यायाधीश का विशेषाधिकार है, अनेक लोगों को पसंद नहीं आएगा।

किंतु एक बार फैसला आ जाने के बाद इस पर विवाद समाप्त कर देना चाहिए। न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ ने यह फैसला एक जनहित याचिका पर दिया है। चार  न्यायमूर्ति जे. चेलमेर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने बाजाब्ता पत्रकार वार्ता आयोजित कर प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा द्वारा पीठों के गठन से लेकर कार्य आवंटन के तरीकों पर प्रश्न खड़ा किया था।

यह सर्वोच्च न्यायालय के इतिहास में पहली बार था जब इस तरह चार न्यायाधीश मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ आए। उस समय से देश में यह बहस चल रही थी कि आखिर किसी मामले पर पीठ का गठन या किस मुकदमे को किस न्यायाधीश को देना है, इन सबका निर्णय मुख्य न्यायाधीश का विशेषाधिकार है या इसके लिए कोई नियम और परंपरा स्थापित है?

यह भी प्रश्न उठाया जा रहा था कि क्या इसके लिए कुछ नियम और परंपराएं बनाई जानी चाहिए? अब इन सब प्रश्नों का उत्तर दे दिया गया है। मसलन, कौन सा मामला कौन न्यायाधीश सुनेंगे, इसका सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति के आधार पर कायम वरिष्ठता से कोई लेना-देना नहीं है। व्यावहारिक तौर पर देखा जाए तो सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति के बाद सभी न्यायाधीश हैं और उनका फैसला सर्वोच्च न्यायालय का ही फैसला होता है।

इस सर्वोच्च अदालत के सभी न्यायाधीशों को उनके अपने पद के अनुरूप योग्य एवं सक्षम माना जाता है। इसी आधार पर किसी मामले को कुछ विशेष न्यायाधीशों को सौंपते हैं कि उनकी नियुक्ति पहले हुई है तो फिर हम यह भी मान लेते हैं कि फलां-फलां न्यायाधीश इस मामले की सुनवाई की योग्यता नहीं रखते। यह सोच कितना गलत होगा इसे बताने की आवश्यकता नहीं।

इसी तरह, प्रधान न्यायाधीश दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों के साथ ही पीठ में बैठें या पांच सदस्यीय पीठ के गठन के लिए न्यायाधीशों की श्रेणी तय किया जाए; आदि जैसे मसलों को उठाना प्रधान न्यायाधीश के कार्यक्षेत्र में दखल देना होगा। फैसले में साफ कहा गया है कि पीठों का गठन और मामले का आवंटन का अधिकार प्रधान न्यायाधीश को संविधान के तहत मिला हुआ है और उन्हें स्वयं में एक संस्था माना गया है। इसके बाद विवाद पर विराम लगना चाहिए।