सुनिश्चित हो रिहाई

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अफगानिस्तान के बघलान प्रांत में 6 भारतीय इंजीनियरों का अपहरण निश्चय ही चिंताजनक है। हालांकि यह पूरी तरह साफ नहीं हुआ है कि उनका अपहरण किसने किया है? चूंकि उत्तरी अफगानिस्तान में तालिबान का प्रभाव ज्यादा है इसलिए आम धारणा सही है कि उन्होंने ही इनका अपहरण किया होगा।

जो सूचना है बघलान की राजधानी पुल-ए-खोमरे के बाग-ए-शामल गांव में इनका अपहरण उस समय किया गया, जब ये मिनी बस से सरकारी पावर स्टेशन जा रहे थे। अपहृत लोग भारतीय कंपनी केईसी इंटरनेशनल लिमिटेड में काम करते हैं। विदेश मंत्रालय उनकी रिहाई के लिए सक्रिय हो गया है। काबुल स्थित दूतावास ने भी कहा है कि वो उनकी रिहाई की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। अफगानिस्तान के संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संवाद चल रहा है। अभी यह भी पता नहीं है कि उनका अपहरण क्यों किया गया? क्या इसके पीछे फिरौती का लालच है?

इस समय  अफगानिस्तान में फिरौती के लिए अपहरण की घटनाएं लगातार हो रही हैं। गरीबी और बढ़ती बेरोजगारी की वजह से कानून-व्यवस्था की  स्थितियां ज्यादा खराब हुई हैं। इसमें फिरौती के लिए स्थानीय कर्मचारियों के अपहरण की घटनाएं बढ़ीं हैं। स्थानीय अधिकारियों का बयान है कि संभवत: तालिबान ने स्थानीय कर्मचारी समझकर अपहरण किया है। इसका पता तो तभी चलेगा जब अपहरणकर्ताओं से संपर्क हो। जाहिर है, स्थानीय अधिकारी ही उनसे सपंर्क कर रिहाई के लिए बातचीत कर सकते हैं।

2016 में एक भारतीय सहायताकर्मी का काबुल में अपहरण हुआ था, जिसे अपहर्ताओं ने 40 दिनों बाद छोड़ा था। भारत सरकार अफगानिस्तान में रह रहे या यात्रा कर रहे भारतीयों के लिए नियमित तौर पर सुरक्षा चेतावनी जारी करती है। इस समय ऐसी कोई चेतावनी जारी नहीं की गई थी। हालांकि ऐसा नहीं है कि इस प्रकार के खतरे का आभास भारत को नहीं था।

इस समय अफगानिस्तान में करीब 150 इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। भारत अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में कई स्तरों पर भूमिकाएं निभा रहा है, जो न केवल वहां के आतंकवादियों को बल्कि, पाकिस्तान को भी नापसंद है। अफगानिस्तान में इस तरह की भूमिका हमारे रणनीतिक हित में भी है। इसलिए अफगानिस्तान में हमें अपनी भूमिका निभाते रहना है। बहरहाल, सरकार को अपनी पूरी ताकत लगाकर उनकी रिहाई सुनिश्चित करनी चाहिए।