सीलिंग रुकी तो निगरानी समिति सुप्रीम कोर्ट पहुंची

सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी में कहा गया है कि मास्टर प्लान में संशोधन की प्रक्रिया के चलते एमसीडी ने सीलिंग रोक दी है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी समिति ने कहा कि मास्टर प्लान में संशोधन को अंतिम रूप नहीं दिया गया है लेकिन फिर भी स्थानीय निकाय अनधिकृत निर्माण को सील करने में आनाकानी कर रहे हैं।
जस्टिस उदय उमेश ललित और दीपक गुप्ता की बेंच के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि इस पर 14 जून को सुनवाई की जाएगी। सीलिंग के मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने अदालत के समक्ष इसका उल्लेख किया और 15 मई के आदेश की ओर उसका ध्यान आकषिर्त किया। इस आदेश में कहा गया था कि निगरानी समिति अपना कार्य जारी रखेगी।   
वकील रंजीत कुमार ने अदालत में निगरानी समिति की एक रिपोर्ट पेश की और कहा कि सरकारी प्राधिकारियों ने कहा है कि चूंकि मास्टर प्लान-2021 में संशोधन को अंतिम रूप नहीं दिया गया है, इसलिए वे सीलिंग करने की अनुमति नहीं देंगे। वकील ने कहा कि आठ जून को निगरानी समिति ने दक्षिण दिल्ली के कुछ इलाकों का निरीक्षण किया था और दक्षिण दिल्ली नगर निगम के संबंधित प्राधिकारियों से कुछ अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा था। लेकिन प्राधिकारियों ने कहा कि हम  सीलिंग नहीं करेंगे।
 इस पर अदालत ने वकील से कहा कि इस रिपोर्ट की प्रति दिल्ली सरकार, केन्द्र सरकार और दक्षिण दिल्ली नगर निगम को दी जाए और हम इस पर 14 जून को सुनवाई करेंगे। दिल्ली विकास प्राधिकरण(डीडीए) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल मनिन्दर सिंह ने कहा कि वह प्राधिकरण को इस बारे में सूचित कर देंगे।  
दिल्ली का मास्टर प्लान-2021 महानगर में शहर के नियोजन और विस्तार से संबंधित समेकित विकास सुनिश्चित करने का ब्लू ¨पट्र है और इसमें संशोधन का मकसद दुकान एवं रिहायशी भूखंडों तथा परिसरों को रिहाइशी भूखंडों के एफएआर के बराबर लाना है।
 निगरानी समिति में निर्वाचन आयोग के पूर्व सलाहकार केजे राव, पूर्व नौकरशाह भूरे लाल अर सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सोम झिंगन हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जनता से आपत्ति-सुझाव के बिना मास्टर प्लान में संशोधन के अनुरोध को ठुकरा दिया था। डीडीए ने अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का भी गठन किया है।