सीलिंग में डाली बाधा तो जेल

सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

उच्चतम न्यायालय ने आज सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि दिल्ली में अनाधिकृत और अवैध निर्माण की सीलिंग करने के सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालने वालों को अदालत से सीधे तिहाड़ जेल भेज दिया जायेगा।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की खंडपीठ ने इस चेतावनी के साथ ही नजफगढ जोन की वार्ड समिति के अध्यक्ष मुकेश सूर्या की बिना शर्त माफी स्वीकार कर ली। मुकेश पर अधिकारियों को धमकी देने के आरोप थे। शीर्ष अदालत में फोरम आफ एमसीडी इंजीनियर्स ने आरोप लगाया था कि सूर्या ने अधिकारियों को उस वक्त धमकियां दीं जब वे न्यायालय द्वारा नियुक्त निगरानी समिति के निर्देशानुसार अवैध निर्माण सील करने गये थे।

इस मामले में संक्षिप्त सुनवाई के दौरान सूर्यां के वकील ने पीठ को सूचित किया कि उनके मुवक्किल ने अपने कृत्य के लिये बिना शर्त माफी मांगते हुये एक हलफनामा दाखिल किया है और वह भविष्य में ऐसा नहीं करेंगे।

पीठ ने कहा, यह सुनिश्चित कीजिए कि इसकी पुनरावृत्ति नहीं हो और यदि आपने दुबारा किया, फिर सूटकेस के साथ ही अदालत आयें क्योंकि आपको यहीं से सीधे जेल भेज दिया जायेगा। शीर्ष अदालत ने इससे पहले अनाधिकृत निर्माण की सीलिंग करने वाले सरकारी अधिकारियों को धमकियां देने वालों को चेतावनी दी थी और कहा था कि इस तरह की ‘दादागिरी’ नहीं चलेगी।

इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे एक वकील ने पीठ से कहा कि फोरम आफ एमसीडी इंजीनियर्स का कहना है कि उन्हें ऐसे क्षेत्रों में ग्रिड अधिकारी नियुक्त किया गया है जो नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। वे चाहते हैं कि उन्हें ऐसे इलाकों के लिये जिम्मेदारी नहीं दी जाए। फोरम के वकील ने कहा कि उन्होंने इस बारे में एक अर्जी भी दायर की है। पीठ ने कहा कि इस मामले में 14 अगस्त को विचार किया जायेगा।

शीर्ष अदालत ने पिछले महीने निर्देश दिया था कि दिल्ली में अवैध निर्माणों की सीलिंग या उन्हें गिराने का काम नहीं रोका जायेगा। इससे पहले केन्द्र ने कहा था कि उसने किसी भी स्थानीय निकाय को सीलिंग अभियान धीमा करने के लिये कोई निर्देश नहीं दिया है। न्यायालय राजधानी में अनधिकृत और अवैध निर्माणों से उत्पन्न समस्या से संबंधित मुद्दों पर विचार कर रहा था।