सिफारिश नहीं काम का होगा सम्मान

सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि अब सिफारिशों के आधार पर नहीं बल्कि काम के आधार पर शिक्षकों को पुरस्कार दिए जायेंगे। इसलिए इस बार से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की चयन प्रक्रिया बदली  गयी है।
जावड़ेकर ने आज यहां शिक्षक दिवस पर विज्ञान भवन में आयोजित पुरस्कार समारोह में यह बात कही। इस अवसर पर देश के केवल 45 चुनिंदा शिक्षकों को पुरस्कार प्रदान किये गये। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने इन शिक्षकों को पदक, प्रशस्ति पत्र और 50 हजार रुपये का चेक प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। इससे पहले हर साल तीन सौ से अधिक शिक्षकों को  पुरस्कृत किया जाता था।
मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि पहले शिक्षक पुरस्कार के लिए राज्यों से सिफारिशें आती थी लेकिन इस बार चयन प्रक्रिया बदल दी गयी है और उसे पारदर्शी बना दिया है। अब सिफारिशों के आधार पर नहीं बल्कि काम के आधार पर पुरस्कार दिये जायेंगे। अब पुरस्कार के लिए  नवाचार को बढ़ावा देने वालों को अवसर दिया है।
उन्होंने कहा कि अब  शिक्षक खुद भी अपने नाम का प्रस्ताव कर सकते हैं। इन शिक्षकों ने खुद ऑनलाइन आवेदन किया और अपने काम का वीडियो भी डाउनलोड किया। कुल 6500 शिक्षकों के आवेदन मिले, प्रत्येक जिले से तीन-तीन नाम आये और फिर उनकी छटायी के बाद  छोटे बड़े राज्यों से तीन से लेकर छह शिक्षकों के नाम आये और इस तरह कुल डेढ़ सौ शिक्षकों का चयन हुआ फिर एक राष्ट्रीय जूरी ने उनमें से 45 शिक्षकों का चयन पुरस्कार के लिए किया। उन्होंने कहा कि इस बार पुरस्कार ऐसे लोगों को दिया गया जिनके नाम पहले आ नहीं सकते थे। उन्होंने कहा कि इन पुरस्कृत शिक्षकों में कई ऐसे हैं जिन्होंने छात्रों को शिक्षा देने के लिए खुद मोबाइल एप्प बनाये।
इन शिक्षकों ने अपने स्कूलों में विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने की संख्या भी कम की है और समुदाय को भी स्कूलों से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों के काम को एक फिल्म में भी यहां दिखाया गया है। इस फिल्म को मानव संसाधन विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर भी डाला जायेगा ताकि दूसरे शिक्षक भी इनसे प्रेरणा ले सकें।