सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, पटियाला रोडरेज मामले में बरी

समयलाइव डेस्क/भाषा , नयी दिल्ली

उच्चतम न्यायालय ने पूर्व क्रिकेटर और पंजाब सरकार में पर्यटन मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को साल 1988 के रोड रेज मामले में गैर इरादतन हत्या के अपराध में दोषी ठहराने का उच्च न्यायालय का फैसला पलटते हुये उन्हें आज जानबूझ कर चोट पहुंचाने के अपराध का दोषी ठहराया। अदालत ने उन पर एक हजार रूपए का जुर्माना लगाया।      

न्यायमूर्ति जे. चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत जानबूझ कर चोट पहुंचाने के अपराध के दोषी हैं। न्यायालय ने उन्हें जेल की सजा नहीं सुनायी बल्कि उन पर एक हजार रूपए का जुर्माना लगाया।      

न्यायालय ने सिद्धू के सहायक रूपिन्दर सिंह संधू को बरी करते हुये कहा कि हमने संधू के मामले में उच्च न्यायालय का फैसला पूरी तरह पलट दिया है।      

धारा 323 के अंतर्गत अधिकतम एक साल की कैद या एक हजार रूपए जुर्माना अथवा दोनों सजा का प्रावधान है।      

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने दिसंबर, 2006 में निचली अदालत का निर्णय निरस्त करते हुये सिद्धू और संधू को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुये दोनों को तीन तीन साल की कैद और एक एक लाख रूपए जुर्माने की सजा सुनायी थी। निचली अदालत ने सितंबर, 1999 में सिद्धू को हत्या के आरोपों से बरी कर दिया था।      

शीर्ष अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सिद्धू और संधू की अपील पर 18 अप्रैल को सुनवाई पूरी की थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान सिद्धू की ओर से दलील दी गयी थी कि मृतक गुरनाम सिंह की मृत्यु के कारणों के बारे में साक्ष्य परस्पर विरोधाभासी हैं और इस मामले मे चिकित्सकीय राय भी अस्पष्ट है।     

उच्चतम न्यायालय ने 2007 में सिद्धू और संधू को दोषी ठहराने के फैसले पर रोक लगा दी थी। इस तरह सिद्धू के लिये अमृतसर संसदीय सीट के लिये उस समय हो रहे उपचुनाव में खड़े होने का रास्ता साफ हो गया था।     

अभियोजन पक्ष के अनुसार 27 दिसंबर, 1988 को पटियाला में सिद्धू और संधू ने शेरावालां गेट क्रॉसिंग के निकट बीच सड़क में कथित रूप से जिप्सी पार्क कर रखी थी। उस समय मृतक दो अन्य लोगों के साथ बैंक से पैसा निकालने जा रहा था।     

आरोप था कि जब वे क्रॉसिंग पर पहुंचे तो मारूति कार चला रहे गुरनाम ने बीच सड़क पर जिप्सी खड़ी देखी तो उन्होंने उसमें सवार सिद्धू और संधू से इसे हटाने का अनुरोध किया। इसी बात पर दोनों में तकरार हो गयी।      

पुलिस का दावा था कि सिद्धू ने सिंह की पिटाई की और फिर घटनास्थल से भाग गये। सिंह को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत लाया गया घोषित कर दिया गया था।     

सिद्धू पहले भाजपा में थे लेकिन पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस में शामिल हो गये थे।      

शीर्ष अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान 12 अप्रैल को पंजाब की अमरिन्दर सिंह सरकार ने सिद्धू को दोषी ठहराने और तीन साल की सजा देने के उच्च न्यायालय के फैसले को सही ठहराया था।