सिंधु जल संधि विवाद सुलझाने की रूपरेखा तैयार : संरा

भाषा, संयुक्त राष्ट्र

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई सिंधु जल संधि दोनों देशों के बीच हुए विवादों के बावजूद बची हुई है और नदी जल प्रयोग के संबंध में उत्पन्न असहमति को सुलझाने का रूपरेखा मुहैया करा रही है।
स्टॉकहोम में कल पानी पर एक उच्च स्तरीय पैनल को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव अमीना मोहम्मद ने कहा कि पानी सहयोग, साझा विकास और पारस्परिक समर्थन का एक स्रोत बन सकता है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि ‘जल युद्ध’ में पड़ना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक भूल होगी।
उन्होंने कहा, ‘जब हम इतिहास की तरफ देखते हैं, तो हम पाते हैं कि पानी पर सहयोग के माध्यम से पानी के लिए संघर्ष पर जीत हासिल की जा सकती है। हालांकि, पानी पर व्यवहार कुशलता कभी कभार ‘जल कूटनीति’ के रूप में जाना जाता है। पड़ोसी देशों को जल संसाधनों पर सहयोग से होने वाले लाभों की याद दिलायी जा सकती है।’

चर्चा को पाक पहुंचा भारतीय प्रतिनिधिमंडल
लाहौर (भाषा)। भारतीय जल आयोग का एक प्रतिनिधिमंडल सिंधु जल संधि के विभिन्न पहलुओं पर अपने समकक्षों से महत्वपूर्ण बातचीत करने के लिए मंगलवार को पाकिस्तान पहुंचा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के पद संभालने के बाद दोनों देशों के बीच यह पहला द्विपक्षीय संवाद होगा। पाकिस्तान जल आयुक्त सैयद मेहर अली शाह और अतिरिक्त आयुक्त शेराज जमील ने वाघा सीमा से होकर यहां पहुंचने पर जल आयुक्त पी के सक्सेना नीत नौ सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगवानी की। शाह ने कहा कि लाहौर में बुधवार और गुरुवार को जल मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत होगी। खान के 18 अगस्त को प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच यह बातचीत पहला आधिकारिक संवाद होगा।