साहसी रक्षा खरीद

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रक्षा मंत्रालय की रक्षा अधिग्रहण परिषद या डीएसी द्वारा एक साथ थल सेना और नौसेना के लिए व्यापक अस्त्र-शस्त्र खरीदी को मंजूरी से न केवल लंबे समय से अटकी आवश्यकताएं पूरी होंगी, बल्कि नई सामरिक चुनौतियों से निपटने में भी हमें सक्षम बनाएंगी। इसमें नौसेना के लिए 111 यूटीलिटी हेलिकॉप्टर, 24 मल्टीरोल हेलिकॉप्टर, 150 आधुनिक आर्टलिरी गन सिस्टम तथा 14 मिसाइल सिस्टम शामिल हैं।

कुल मिलाकर इन सारी खरीद पर लगभग 46 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसमें अमेरिका के साथ 13,500 करोड़ की गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट खरीद भी शामिल है। जैसा हम जानते हैं, डीएसी सेना से जुड़ी खरीदी पर फैसला करने वाली सबसे बड़ी ईकाई है। 21 हजार करोड़ की यूटिलिटी हेलिकॉप्टर की यह खरीद भारत की मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा देने वाला है।

इसमें भारतीय कंपनियां विदेशी साझीदार के साथ सहयोग कर इसके लिए विशिष्ट तकनीक हासिल करेगी। सरकार का उद्देश्य रणनीतिक साझेदारी के तहत देश में ही रक्षा उत्पादन और शोध का ढांचा तैयार करना है। इससे देश में रक्षा उड्डयन उद्योग का भी विस्तार होगा। थल सेना के लिए लगभग 24,879 करोड़ रुपये खर्च वाली खरीद में 155 एमएम उन्नत 150 आर्टलिरी गन (तोप) भी शामिल है।

इसे देश में ही डिजाइन और विकसित किया जा रहा। इस पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन काम कर रहा है। इस पर 3364 करोड़ का खर्च आएगा। इसी तरह नौसेना के लिए छोटी रेंज के 14 मिसाइल सिस्टम में से 10 भारत में भी बनाए जाएंगे। 24 मल्टी रोल वाले एमएच-60 रोमियो चॉपर्स को अमेरिका के लौकहिड मार्टनि ने जीटूजी के तहत खरीदी होगी।

2011 में रिक्वेस्ट फॉर इन्फार्मेशन आरएफआई दिया था। सरकार के कहने पर पिछले साल अगस्त में 111 यूटिलिटी और 123 मल्टीरोल हेलिकॉप्टर की आरएफआइ दिया। पनडुब्बी रोधी क्षमता वाला 24 बहुउद्देश्यीय हेलिकॉप्टर चीनी पनडुब्बियों के समानांतर नौसेना की धावा बोलने की अग्रिम पंक्ति के महत्त्वपूर्ण अस्त्र-शस्त्र और उपकरणों के भाग होंगे।

मिसाइल प्रणाली को नौसेना समुद्र में अपने जहाजों को दुश्मन के हमलों से बचाने के लिए रक्षा कवच बनाएगी। गन सिस्टम की आवश्यकता तो सेना काफी पहले से बता रही थी। बोफोर्स के बाद कोई खरीदारी या निर्माण हुआ ही नहीं। इस तरह यह सीमा पर सेना के मुख्य हथियारों का हिस्सा होगा।