सावन में शिव को ऐसे करें प्रसन्न, पूरी होगी कामना

समयलाइव डेस्क, नयी दिल्ली

श्रावण मास शिवजी की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। सच्चे अर्थों में जो शिव साधक हैं, वे पूरे वर्ष श्रावण मास का इंतजार करते हैं और मनोकामना की पूर्ति के लिये पहले से तैयारी कर लेते हैं जिससे वह इस पवित्र माह में पूर्ण होने वाली साधना का पूरा लाभ उठा सकें।

इस माह में की गयी शिव पूजा का फल वर्ष में की गयी शिव पूजा के फल के बराबर मिलता है। सावन शनिवार से शुरू हो गया।

धार्मिक दृष्टि से संपूर्ण प्रकृति शिव का रूप है। उसका न कोई स्वरूप है, न कोई चिन्ह है क्योंकि पृथ्वी, जल, वायु, तेज, आकाश, सूर्य, चंद्रमा, आत्मा आदि सभी में शिव तत्व विद्यमान हैं। इसी कारण इस माह में शिव पूजा का विशेष महत्व है। श्रावण माह में वर्षा अधिक होने के कारण चारों ओर जल की मात्रा अधिक होने से शिव का जलाभिषेक किया जाता है।

सावन को क्यों कहते हैं शिव का महीना?

श्रावण मास को भगवान शिव का माह मानने के पीछे एक पौराणिक कथा है। देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से अपने शरीर का त्याग किया था और शरीर त्यागने से पूर्व देवी ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में सती ने पार्वती नाम से हिमालय और मैना के घर जन्म लिया और युवावस्था में श्रावण मास में निराहार रहकर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिये कठोर व्रत किया जिसके फलस्वरूप भगवान शिव प्रसन्न हुये। बाद में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिये श्रावण मास में व्रत रखा जाने लगा।

जल, दूध-दही और शहद से करें अभिषेक

अनादि काल से श्रावण मास में शिवलिंग पर जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक किया जाता है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार समुद्र मंथन से उत्पन्न विष का पान करने के कारण शिव के शरीर का ताप बढ़ गया था और उस ताप से शीतलता प्रदान करने के लिये इंद्र देव ने अत्यधिक वर्षा करायी जिससे भगवान शिव के विष का ताप समाप्त हो गया और उन्हें शांति मिली। इसी कारण इस माह में शिव अभिषेक करने से मनुष्य जीवन के विष यानी समस्याओं का निदान होता है। शिव पूजन में संपूर्ण रुद्राष्टध्यायी का एक आवृति पाठ और अभिषेक करना विशेष फलदायी है।

मान्यता है कि शिवलिंग पर जलधारा चढ़ाने से शांति मिलती है। दूध और दही की धारा से संतान प्राप्ति होती है। गन्ने के रस से लक्ष्मी प्राप्ति, मधु की धारा से कोष वृद्धि होती है, घृत की धारा से ऐश्वर्य की प्राप्ति और तीर्थजल से किया अभिषेक मोक्ष दिलाता है।

ये पुष्प हैं भोले को प्रिय

शिवपूजन में तीन दलों से युक्त बिल्व पत्र चढ़ाने से हमारे तीनों जन्मों के पापों का नाश होता है। शिव पर चढ़ाये जाने वाले पुष्पों में श्रेष्ठ पुप्प कनेर, आक, धतूरा, कमल, चमेली, चंपा, गुलाब, खश, गूलर, पलाश, बेला, केसर आदि हैं। श्रावण मास में शिवजी पर सतनजा और शमी पत्र चढ़ाने से मनोरथ पूर्ण होते हैं। सावन मास के प्रथम सोमवार को कच्चे चावल, द्वितीय सोमवार को सफेद तिल, तृतीय सोमवार को खड़ा मूंग, चतुर्थ सोमवार को जौ चढ़ाना चाहिये।

भूलकर भी न चढ़ाएं ये फूल

शिव पूजन में कदम, केवड़ा, कैथा, बहेड़ा, कपास, सेमल, जूही के फूल चढ़ाना निषिद्ध होता है।