सामाजिक सुरक्षा ढांचा

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पहली नजर में सरकार द्वारा सबको मुफ्त चिकित्सा, पेंशन और बेरोजगारी भत्ता दिलाने वाले सामाजिक सुरक्षा विधेयक को संसद के इसी सत्र में पारित कराने की कोशिश आकर्षित करती है। सरकार विपक्षी दलों को मनाने के लिए प्रयासरत है कि इस विधेयक को समर्थन दे दें। विधेयक का जो प्रारूप सामने आया है, उसके अनुसार इसके तहत देश के प्रत्येक नागरिक चाहे वो अमीर हों या गरीब सभी का निबंधन किया जाएगा। इसमें कई अन्य योजनाओं की तरह उम्र का भी कोई बंधन नहीं होगा। इसमें यदि निबंधित व्यक्ति की नौकरी छूट गई तो उसे बेरोजगारी भत्ता भी दिया जाएगा।

प्रश्न है कि इसके लिए धन कहां से आएगा? इसके उत्तर में कहा गया है कि धन की व्यवस्था केंद्र सरकार, राज्य सरकार और निजी क्षेत्र के जरिए की जाएगी। पता नहीं इसमें कितनी सफलता मिलेगी, क्योंकि अभी तक ऐसे व्यापक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के किसी ढांचे का देश को अनुभव है ही नहीं। किंतु इसका विरोध भी हो रहा है। विरोधी दलों को लगता है कि सरकार 2019 चुनाव में इसका राजनीतिक लाभ उठा लेगी। इसलिए वो इस पर कई प्रश्न उठा रहे हैं। इसी तरह सरकार ने इस पर एकराय बनाने के लिए श्रमिक संगठनों की बैठक बुलाई थी, जिसमें कई संगठनों ने भाग ही नहीं लिया।

ये भी कई प्रश्न उठा रहे हैं। मसलन, सभी व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए धन कहां से आएगा? दूसरे, नये कानून आने के साथ 15 पुराने कानून समाप्त हो जाएंगे और कार्य करते समय चोट और मृत्यु होने पर मुआवजा नहीं मिलेगा। भविष्य निधि और ईएसआई जैसी सुविधाएं समाप्त हो जाएंगी। हालांकि अगर ऐसी कोई व्यापक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था हो जाए तो बहुत सारी व्यवस्थाओं की आवश्यकता नहीं रह जाएगी और वो सब इनमें समाहित हो जाएंगे। हमारा मानना है कि इस पर राजनीतिक नजरिए से हटकर विचार किया जाना चाहिए।

ऐसा सामाजिक सुरक्षा ढांचा, जिससे कोई नागरिक बाहर रहे ही नहीं, बड़ा संकल्प है। इसमें समस्याएं होंगी। बावजूद इसके इसे कानून का रूप दिलाने में देश को एक होना चाहिए। धनपतियों का निबंधन अवश्य होगा लेकिन वे अपना खर्च स्वयं वहन करेंगे। इसी तरह जो नौकरी करते होंगे उनका खर्च नियोक्ता वहन करेगा। हां, जो गरीबों का खर्च केंद्र और राज्य सरकार वहन करेगी। भविष्य निधि तथा ईएसआई खत्म करने की बात इसमें नहीं है। कोई सरकार पूरा विकल्प दिए बगैर इसे खत्म नहीं कर सकती।