सरदार का संन्यास

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पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान सरदार सिंह ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि सरदार देश के सर्वश्रेष्ठ सेंटर हाफ खिलाड़ी रहे हैं। पर ऐसा लगता है कि सरदार जैसे कद वाले खिलाड़ी ने संन्यास की घोषणा करने में थोड़ी देरी कर दी। वह पिछले एक-दो साल से मिले संकेतों को नहीं समझ पाए और उन्होंने टीम से बाहर होने के बाद यह फैसला किया है। अभी हाल में इस साल के आखिर में भुवनेर में होने वाले हॉकी विश्व कप के लिए घोषित संभावितों में सरदार को शामिल नहीं किया गया, तब उन्हें लगा कि अब शायद अलविदा कहने का समय आ गया है। सरदार जैसे बेहतरीन खिलाड़ी के लिए सही तो यह होता कि इस साल की शुरुआत में विश्व हॉकी लीग फाइनल्स में और फिर न्यूजीलैंड दौरे की टीम में स्थान नहीं मिलने के समय ही संन्यास की योजना बना लेते। यही नहीं ओल्टमेंस ने जब उन्हें उनके नियमित स्थान सेंटर हाफ पर खिलाना बंद किया, उस समय ही संकेतों को समझकर फैसला करना चाहिए था, इससे सम्मान बना रहता। यह सही है कि सरदार बेजोड़ खिलाड़ी रहे हैं पर हर खिलाड़ी पर उम्र का असर होता है। इन हालात में सरदार को जकार्ता एशियाई खेलों की टीम में शामिल किया गया, तब ही यह कहकर जाते यह हमारा आखिरी टूर्नामेंट है तो उनका कद और ऊंचा हो सकता था। यह सही है कि भारत यदि जकार्ता एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर लौटा होता तो शायद यह स्थिति आती ही नहीं। बहुत संभव है कि सरदार भी विश्व कप खेलने के दावेदारों में शामिल रहते। सच यह है कि सरदार या किसी अन्य खिलाड़ी को भी खेलते रहने के मोह से बाहर निकलना चाहिए और अपने प्रदर्शन का सही आकलन करके फैसला करना चाहिए। सरदार सिंह ने अपने प्रदर्शन में आई गिरावट को नजरंदाज करके 2020 के टोक्यो ओलंपिक में खेलने का लक्ष्य बना लिया था। पर उन्हें सही मायनों में पिछले दिनों कोच शोर्ड मारिन के एशिया कप के बाद यह कहने पर कि तुम्हारा समय खत्म हो गया है, इसे ध्यान में रखकर संन्यास की योजना बना लेनी चाहिए थी। यह सही है कि वह हमेशा बेजोड़ हॉकी खिलाड़ी के तौर पर याद रखे जाएंगे। वह अपने खेल में सुधार के लिए हमेशा प्रयासरत रहते थे। वह अक्सर फुटबालर लियोनेल मेसी और जाबी हेरनांडेज जैसों के वीडियो देखकर अपने खेल को निखारने में प्रयासरत रहे। इस लिहाज से सरदार का रिटायर होना दुखद है।