संयुक्त राष्ट्र को हिन्दी में संबोधित करने वाले पहले भारतीय नेता थे वाजपेयी

भाषा/वार्ता, संयुक्त राष्ट्र/नई दिल्ली

अटल बिहारी वाजपेयी भारत के ऐसे पहले विदेशमंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिन्दी में भाषण दिया था और परमाणु निरस्त्रीकरण, सरकार प्रायोजित आतंकवाद और विश्व संस्था में सुधार जैसे अहम मुद्दों पर बेहद प्रभावी तरीके से भारत का रुख स्पष्ट किया था।
वर्ष 1977 से 2003 तक बतौर विदेशमंत्री एवं प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सात बार संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) को संबोधित किया। अपनी वाकपटुता के लिए मशहूर वाजपेयी ने वर्ष 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली सरकार में बतौर विदेश मंत्री पहली बार यूएनजीए के 32वें सत्र को संबोधित किया था। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, संयुक्त राष्ट्र में मैं नया हूं, लेकिन भारत नहीं। हालांकि इस संगठन के साथ मैं इसके आरंभ से ही बेहद सक्रिय रूप में जुड़ा हूं। वाजपेयी ने इस ऐतिहासिक संबोधन में कहा, एक ऐसा शख्स जो अपने देश में दो दशक और उससे अधिक समय तक सांसद रहा, लेकिन पहली बार राष्ट्रों की इस सभा में हिस्सा लेकर अपने अंदर विशेष अनुभूति महसूस कर रहा हूं। यह पहली बार था जब किसी भारतीय नेता ने यूएनजीए में अपना भाषण हिन्दी में दिया था क्योंकि वैश्विक मंच पर प्रमुख भाषा होने के कारण अन्य भारतीय नेता अंग्रेजी भाषा का चयन करते थे।
कहा जाता है कि वाजपेयी धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलते थे, लेकिन संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण के लिए उस वक्त हिन्दी के चयन के पीछे उनका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय पटल पर हिन्दी को उभारना था। उन्होंने गुटनिरपेक्ष आंदोलन के विषय को छुआ और कहा कि भारत शांति, गुटनिरपेक्षता एवं सभी देशों के साथ मित्रता के लिए बहुत दृढता के साथ खड़ा है। वाजपेयी ने कहा, वसुधैव कुटुम्बकम की परिकल्पना बहुत पुरानी है। भारत में सदा से हमारा इस धारणा में विश्वास रहा है कि सारा संसार एक परिवार है।

निधन पर चीन, पाक ने भी जताया शोक
पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर शोक व्यक्त किया है। पाकिस्तान सरकार के प्रवक्ता ने एक वक्तव्य जारी कर कहा, वाजपेयी एक प्रसिद्ध राजनेता थे जिन्होंने भारत-पाकिस्तान संबंधों में बदलाव लाने में अहम योगदान दिया।
वह विकास के लिए क्षेत्रीय सहयोग का समर्थन करते हुए दक्षेस के प्रमुख समर्थक रहे। वक्तव्य के मुताबिक,  पाकिस्तान की सरकार और वहां के लोग वाजपेयी के परिवार तथा भारत सरकार एवं भारत के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं। श्रीलंका के राष्ट्रपति महिन्दा राजपक्षे ने भी वाजपेयी के निधन पर शोक प्रकट किया है। राजपक्षे ने ट्विटर पर लिखा, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से भारत ने एक महान नेता खो दिया है।