शून्य कौन भरेगा?

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भारतीय राजनीति में संघवाद और क्षेत्रीय अस्मिता का परचम लहराने वाले मुथुवेल करुणानिधि के जाने से तमिलनाडु की राजनीति में जो शक्ति-शून्यता उभरी है, उसे कौन भरेगा, कहना मुश्किल है। पिछले पांच दशकों से भी ज्यादा समय तक वह सत्ता में रहे हों, या विपक्ष में, प्रदेश की राजनीति उनके आसपास घूमती रही है। केंद्र में जब गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हुआ तब किंगमेकर की भूमिका में उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया, लेकिन अपने को प्रदेश की राजनीति तक ही सीमित रखा। प्रधानमंत्री पद की दौड़ में कभी शामिल नहीं हुए।

शायद इस तथ्य से वाकिफ थे कि हिंदी विरोधी छवि के कारण उत्तर भारत उन्हें कभी स्वीकार नहीं करेगा। लेकिन द्रविड़ आंदोलन के साथ-साथ राज्यों की स्वायत्तता के लिए उन्होंने जो संघर्ष किया, उसे शायद ही कोई भूल पाएगा। जाहिर है कि ऐसे कद्दावर नेता के जाने से उनकी पार्टी द्रमुक और प्रदेश की राजनीति दोनों नेतृत्वविहिन हो गई है। दक्षिण भारत की राजनीति करिश्माई नेताओं से संचालित होती रही है। एमजी रामचंद्रन, जयललिता, एनटी रामाराव, राजकुमार, करुणानिधि अपने चमत्कारिक नेतृत्व से प्रदेश की जनता के बीच हमेशा लोकप्रिय रहे हैं।

तमिलनाडु में जयललिता और करुणानिधि के निधन से द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों क्षेत्रीय पार्टियों का आंतरिक और बाह्य ढांचा चरमरा गया है। हालांकि अभी वहां अन्नाद्रुमक की सरकार है, मुख्यमंत्री पलानीसामी जयललिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन आगामी लोक सभा के चुनाव में वह अपनी पार्टी को कितना आगे बढ़ा पाते हैं, कहना मुश्किल है। करुणानिधि के दोनों बेटे अलगिरी और स्टालिन में सत्ता संघर्ष पिता के जीवित रहते ही शुरू हो गया था। इन दोनों का व्यक्तित्व भी पिता की तरह करिश्माई नहीं है कि आम जनता के दिलों में अपनी जगह बना सकें।

अभी यह कहना मुश्किल है कि स्टालिन अपने बड़े भाई अलगिरी को कब तक साथ लेकर चल पाते हैं। करुणानिधि के बाद द्रमुक एकजुट रह पाएगा या नहीं, यह भी एक बड़ा सवाल है, जिसका जवाब आने वाले दिनों में ही मिल पाएगा। हाल ही में तमिलनाडु की राजनीति में दो फिल्मी हस्तियां रजनीकांत और कमल हासन की इंट्री हुई है। इन दोनों के समर्थकों की तादाद बड़ी संख्या में हैं, और इनका व्यक्तित्व भी करिश्माई है। लेकिन राजनीति में इनकी परीक्षा अभी होनी है। कमल हासन और रजनीकांत क्षेत्रीय चेहरा हैं, अब देखना है इनके साथ कौन जाता है।