विधानसभा में केजरीवाल सरकार का प्रस्ताव पारित, मिले दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा

सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

विधानसभा ने सोमवार को दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का केजरीवाल सरकार का प्रस्ताव पास कर दिया। हालांकि उस समय विधानसभा में नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता नहीं थे। प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने केंद्र की मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली को पूर्ण राज्य दर्जा मिल जाता है, तो एक-एक वोट भाजपा को मिलेगा और इसके लिए वह भी भाजपा के समर्थन में प्रचार करेंगे। उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रस्ताव रखा, जो बहुमत के साथ पास हो गया। केजरीवाल ने दिल्ली विविद्यालय के दाखिलों में दिल्ली के युवाओं के लिए 85 फीसद सीट आरक्षित करने की मांग करते हुए कहा यदि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल गया होता, तो अब तक वह 100 नए कॉलेज खोल दिए होते।

मुख्यमंत्री अरिवन्द केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उप-राज्यपाल अनिल बैजल ‘लाट साहब’ एवं ‘भाजपा के वायसराय’ जैसी उपाधियां दे डाली। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार उन्हें काम नहीं करने दे रही है और इसकी मूल वजह दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा न होना है। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा होता, तो वह अब तक नये अस्पताल, स्कूल, सीसीटीवी, मोहल्ला क्लीनिक खोलने समेत सभी कार्य पूरे कर चुके होते, लेकिन भाजपा के वायसराय उन्हें कोई काम नहीं करने दे रहे। दिल्ली में आज भी राजाओं का राज है।

इससे पहले दिल्ली के राजा महाराज नजीब जंग थे और अब महाराज अनिल बैजल हैं। यह सरकार सरेआम दिल्लीवासियों की पगड़ी उछाल रही है। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला होता, तो दिल्ली के विकास के लिए उन्हें हजारों करोड़ का बजट मिलता जबकि दिल्ली वासी हर साल केंद्र को 1.30 करोड़ रुपए का आयकर देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि दिल्लीवासियों के टैक्स का पैसा उनके पास मिलता, तो वह वह हर दिल्लीवासी को 5 साल में घर बनाकर दे सकते थे, दिल्ली को वह लंदन बना देते। दिल्ली के लाट-साहब के हर मामले में लगातार रोड़े अटकाने के बावजूद सरकार अच्छा काम कर रही है। जिसकी वजह से दिल्लीवासियों का सीना फक्र से 59 इंच का हो गया है यानी 56 इंच से भी अधिक।

प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय गृहमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास दिल्लीवासियों से मिलने का समय नहीं है। आज दिल्ली में कानून व्यवस्था की स्थिति यह है कि उन्हें पता नहीं कि उनकी बेटी को कहीं कुछ न हो जाए। दिल्ली के स्कूलों व नौकरियों में आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनके युवाओं को पहले नौकरी मिलनी चाहिए। इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन, नरेंद्र पाल गौतम समेत विधायकों ने भी अपने  विचार रखे।