विद्युतीकरण का राग

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राजनीतिक पार्टियों के बीच यह विवाद चलता रहेगा कि देश के सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने का श्रेय किसे दिया जाना चाहिए। 28 अप्रैल को स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दावा किया कि सभी गांवों तक बिजली पहुंच गई है। मणिपुर का लेइसांग गांव सबसे अंतिम गांव था, जहां बिजली पहुंचाई गई। लेइसांग गांव में कुल 19 परिवारों में 31 पुरुष और 34 महिलाएं यानी 65 लोग रहते हैं।

अगर इतने दूरस्थ-दुर्गम छोटे गांव तक बिजली पहुंच गई तो हमें यह मान लेना होगा कि अन्य गांवों में भी ऐसा हो गया होगा। हालांकि कई रिपोर्टें बता रही हैं कि ऐसे भी गांव हैं, जहां बिजली के खंभे एवं तार पहुंच गए लेकिन विद्युत आपूर्ति नहीं हो रही। हम यह भी उम्मीद करेंगे कि जहां-जहां वास्तव में बिजली की आपूर्ति नहीं हो रही है, उनकी सूची बनाकर काम करें। वैसे भी बिजली की स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सतत काम करने की आवश्यकता होती है। ऐसा नहीं होता कि आपने एक बार खंभा और तार पहुंचा दिया और बिजली सुनिश्चित हो गई। कई कारणों से यह बाधित होता है।

कई बार खंभे और तार टूटते रहते हैं। ट्रांसफॉर्मर में खराबी आती रहती है। इसी तरह, बिजली के खंभे एवं तार पहुंचाने तथा आपूर्ति करने से बड़ी चुनौती गांवों के वास्तविक विद्युतीकरण का है। हमने गांव तक बिजली पहुंचा दिया, लेकिन वहां परिवारों की ऐसी स्थिति ही नहीं कि वे कनेक्शन ले सकें और उसके शुल्क का नियमित भुगतान कर सकें। तो वहां बिजली पहुंचने का मतलब क्या है?

उसकी सुलभता आसान करने के लिए सरकार के पास कोई प्रोत्साहन योजना है?  अभी तक तो नहीं। नियम के अनुसार तो जिस गांव के दस प्रतिशत परिवारों ने बिजली का कनेक्शन ले लिया उसे विद्युतीकृत गांव मान लिया जाता है। हालांकि सरकार ने दावा किया है कि गांवों में बिजली कनेक्शन लेने की दर औसत 80 प्रतिशत है। केन्द्र ने यह दावा राज्यों से प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर किया है।

इसमें कुछ कागजी हो सकते हैं। लेकिन कुल मिलाकर गांवों का विद्युतीकरण हुआ है, यह सच है। सरकार ने 31 दिसम्बर 2018 तक सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना-सौभाग्य योजना का शुभारंभ किया है। यह योजना अपने लक्ष्य के अनुरु प सफल हो एवं हर घर को बिजली कनेक्शन मिल जाए। किंतु न केवल कनेक्शन बल्कि उसे बनाए रखने और आपूर्ति सुनिश्चित करने में राज्यों की भूमिका अहम है।