वरिष्ठ नागरिक : न हो उपेक्षा और उत्पीड़न

जयंतीलाल भंडारी,

हाल ही में 8 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र संघ के लिए एजवेल रिसर्च एंड एडवोकेसी सेंटर द्वारा भारत में बुजुगरे की स्थिति पर किए गए सव्रेक्षण पर आधारित प्रस्तुत की गई चिंताजनक रिपोर्ट को देश और दुनिया में गंभीरतापूर्वक पढ़ा जा रहा है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में  60 वर्ष से अधिक उम्र के 52.4 फीसदी वृद्धजन उपेक्षा और उत्पीड़न का सामना करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के 88.5 फीसदी बुजुर्ग स्वास्थ संबंधी सुविधाओं की अपेक्षा कर रहे हैं। साथ ही, उनकी सरकार से भी अपेक्षा है कि सरकार आर्थिक-सामाजिक कल्याण के लिए और अधिक व्यावहारिक सुविधाएं उपलब्ध कराए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वृद्धजनों को आर्थिक तर पर आत्मनिर्भर बनाने के रणनीतिक प्रयास जरूरी हैं।  
इसी प्रकार पिछले माह जून में देश के प्रमुख गैर-सरकारी संगठन हेल्पेज इंडिया द्वारा देश के प्रमुख 23 शहरों में वरिष्ठ नागरिकों के जीवन की मुश्किलों पर प्रकाशित सव्रेक्षण रिपोर्ट के अनुसार वरिष्ठ नागरिकों के साथ र्दुव्‍यवहार की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इन 23 शहरों में मेंगलुरू में सबसे अधिक र्दुव्‍यवहार के मामले सामने आए हैं। यहां 47 फीसदी वरिष्ठ नागरिकों के साथ र्दुव्‍यवहार के मामले पाए गए हैं। इसके बाद अहमदाबाद और भपाल के क्रम हैं, जहां 39-39 फीसदी वरिष्ठ नागरिकों के साथ र्दुव्‍यवहार हुआ। इस शोध से यह भी मालूम हुआ है कि भारतीय वरिष्ठ नागरिकों के साथ र्दुव्‍यवहार के कारण क्या हैं? सव्रेक्षण में पाया गया कि देश के करीब एक-चथाई वरिष्ठ नागरिकों के साथ बदसलूकी का व्यवहार हुआ है। वरिष्ठ नागरिकों के साथ सबसे अधिक र्दुव्‍यवहार करने वाले उनके बेटे और बहुएं हैं।
52 फीसदी बेटों ने और 34 फीसदी बहुओं ने अपने वरिष्ठ नागरिकों के साथ र्दुव्‍यवहार किया। हेल्पेज इंडिया ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए देशव्यापी कैंपेन हैशटैग डिसकनेक्ट 2 कनेक्ट शुरू किया है। इसके तहत युवाओं और वयस्कों से आग्रह किया जा रहा है कि खुद को मोबाइल और कंप्यूटर से अलग करें और घर में बुजुगरे की मौजूदगी को महसूस करके उन्हें सम्मान दें। गौरतलब है कि देश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आर्थिक-सामाजिक कल्याण की तेजी से बढ़ती हुई जरूरत से संबंधित कई रिपोर्टे लगातार प्रकाशित हो रही हैं। संयुक्त राष्ट्र की वरिष्ठ नागरिकों की स्थिति से संबंधित एक ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारतीय समाज में वरिष्ठ नागरिकों को परिवार से अपेक्षित सम्मान में कमी आती जा रही है। अधिकांश भारतीय वरिष्ठ नागरिक अपने ही घर में उपेक्षित और एकाकी जीवन जीने को अभिशप्त हैं। वरिष्ठ नागरिकों में अस्वस्थ होने का अनुपात तेजी से बढ़ा है। विश्व जनसंख्या रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2018 में वरिष्ठ नागरिकों की आबादी 15 करोड़ के पार पहुंच गई है। पिछली जनगणना 2011 में भारत में 10.38 करोड़ लोग 60 वर्ष से अधिक आयु के बताए गए थे । रिसर्च एंड एडवोकेसी सेंटर ऑफ एजवेल फाउंडेशन के एक सव्रेक्षण में शामिल भारत के 60 फीसदी लोगों ने कहा है कि युवा पीढ़ी बुजुगरे की समस्याओं के प्रति जागरूक नहीं है। वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अपराध बढ़ने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है।
20 मार्च, 2018 को केंद्रीय गृह मंत्रालय  द्वारा प्रकाशित ‘भारत में अपराध’ नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अपराध वर्ष प्रतिवर्ष बढ़ रहे हैं। कहा गया है कि वर्ष 2014 में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अपराध के 18,714 मामले दर्ज किए गए थे। इन दर्ज मामलों की संख्या वर्ष 2015 में 20,532 तथा वर्ष 2016 में 21,410 हो गई। वरिष्ठ नागरिकों के प्रति दर्ज ऐसे अपराधों में पहले क्रम पर महाराष्ट्र है। फिर मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना हैं। निस्संदेह तेजी से बढ़ती हुई वरिष्ठ नागरिकों की सामाजिक-आर्थिक मुश्किलों को कम करने के लिए केंद्र सरकार एक के बाद एक कदम उठाते हुए दिखाई दे रही है। हाल में केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और कल्याण कानून, 2007 की समीक्षा करने के बाद इसकी कमियों को दूर करते हुए एक नया ड्राफ्ट तैयार किया है। इसे माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और कल्याण कानून, 2018 नाम दिया गया है। यह मसौदा शीघ्र ही नये कानून का रूप लेगा। इस कानून के तहत बूढ़े माता-पिता को बेसहारा छड़ने या तंग करने वालों को छह महीने तक जेल काटनी पड़ सकती है। अभी इसके लिए तीन महीने तक की जेल का प्रावधान है। नये ड्राफ्ट में मासिक देखभाल भत्ते की 10 हजार रुपये की अधिकतम सीमा भी समाप्त कर दी गई है। जहां वरिष्ठ नागरिकों को कानूनी सहारा देने के लिए नये कानून का मसौदा महत्वपूर्ण दिखाई दे रहा है, वहीं सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के आर्थिक कल्याण के लिए भी कुछ महत्वपूर्ण योजनाएं प्रस्तुत की हैं। पिछले दिनों वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) के तहत निवेश सीमा को वर्तमान 7.5 लाख रुपये से दोगुना कर 15 लाख रुपये करने को मंजूरी दे दी है। पीएमवीवीवाई 60 साल और उससे अधिक उम्र के नागरिकों के लिए है। इस योजना में निवेश की समय सीमा 4 मई, 2017 से 3 मई, 2018 थी। अब इसे बढ़ाकर 31 मार्च, 2020 कर दिया गया है। योजना के तहत लाभार्थी को दस साल की अवधि के लिए न्यूनतम 1,000 रु. पेंशन प्रति माह की गारंटी है।
निश्चित रूप से अब सरकार द्वारा माता-पिता को सहारा देने और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से संबंधित वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिनियम, 2018 के नये ड्राफ्ट के तहत बूढ़े माता-पिता को बेसहारा छोड़ने या तंग करने वालों को छह माह तक जेल काटने जैसे कठोर प्रावधानों को जल्दी ही अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। साथ ही, व्यावहारिक जीवन में इस कानून का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाना होगा। निश्चित रूप से संयुक्त राष्ट्र संघ के लिए एजवेल रिसर्च एवं एडवोकेसी सेंटर द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट, 2018 के मद्देनजर हम हमारे वरिष्ठ नागरिकों के आर्थिक-सामाजिक कल्याण पर उपयुक्त ध्यान देंगे तो इससे केवल उनके चेहरे पर खुशियों की नई मुस्कराहट आ सकेगी वरन् इससे भारत खुशहाल देश बनने की डगर पर भी आगे बढ़ेगा।