रोहिंग्या पर बने नीति

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यह खबर चिंतित अवश्य करती है, लेकिन चौंकाती नहीं कि जम्मू- कश्मीर से आज तक एक भी रोहिंग्या बाहर नहीं किया गया है। सूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में केंद्रीय गृह मंत्रालय के विदेशी मूल के नागरिकों के डिवीजन की ओर से यह जानकारी दी गई। इसलिए इस पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है।

जम्मू-कश्मीर में तो इसी बात पर विवाद है कि वहां म्यांमार से आए रोहिंग्या मुसलमान हैं कितने। पूर्व सरकार द्वारा विधानसभा में दिए गए वक्तव्य के अनुसार जम्मू में 5743 रोहिंग्या रह रहे हैं। हालांकि रोहिंग्याओं पर काम करने वाले मानते हैं कि सुजवान, गंग्याल, बड़ी-ब्राह्मणा आदि इलाकों में रहने वाले सभी रोहिंग्याओं की ठीक से गणना की जाए तो इनकी संख्या 10 हजार से ऊपर होगी। जम्मू-कश्मीर में तो बाजाब्ता उनका स्वागत किया गया। उमर अब्दुल्ला की सरकार ने उनके लिए सारी व्यवस्थाएं कीं।

इस नीति पर लगातार प्रश्न उठते रहे,किंतु जो भाजपा इनको बाहर करने के लिए वहां मांग करती थी, वह भी पीडीपी के साथ सत्ता में आने के बावजूद कुछ नहीं कर सकी। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हालांकि भाजपा नेताओं द्वारा रोहिंग्याओं को बाहर करने की बात उठाई गई किंतु शेष पार्टयिां इसके विरोध में खड़ी हो जाती थीं।

बड़ी अजीब बात है कि इन्हें सुरक्षा के लिए खतरा तो बताया गया। लेकिन इनके साथ करना क्या है, इस पर कोई नीति आज तक नहीं बनी है। जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस या पीडीपी से ऐसी उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए कि ये इनको बाहर भेजने के बारे में विचार तक करेंगे। रोहिंग्या म्यांमार से जम्मू पहुंचे कैसे? यही बड़ा प्रश्न है।

कहीं न कहीं से उनको संकेत मिला, कुछ लोगों ने अवश्य उनको वहां का रास्ता दिखाया नहीं तो इनके जम्मू पहुंचने का कोई कारण दिखता ही नहीं। हालांकि यह सच है कि अभी तक इनका आतंकवाद से किसी तरह का रिश्ता प्रमाणित नहीं हुआ है। छोटे-मोटे अपराधों में ये शामिल रहे हैं।

किंतु भविष्य में भी इसी स्थिति की गारंटी कौन दे सकता है! म्यांमार के कुछ रोहिंग्याओं की जेहादी विचारधारा से जुड़े होने के प्रमाण मिले हैं। उन्होंने कई हिन्दू बस्तियों को घेरकर लोगों को गाजर-मूली की तरह काटा। कुछ की जान तब बची जब वे मुसलमान बनने को तैयार हुए। कई महिलाओं को ये जबरन उठाकर ले गए। इसलिए इनका स्वागत तो नहीं किया जा सकता। देश के कई भागों में ये रह रहे हैं। केंद्र को इनके बारे में निश्चित नीति बनानी चाहिए।