रुपया गिरने, पेट्रोल चढ़ने से गिरा बाजार

देवेन्द्र शर्मा/सहारा न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली

अमेरिकी मुद्रा डालर की तुलना में रुपए में आ रही गिरावट और कच्चे तेल में तेजी से भारतीय अर्थव्यवस्था के समीकरण गड़बड़ा रहे हैं। मुद्रा बाजार में सोमवार को रुपया 72 पैसे टूटकर रिकार्ड 72.45 के निचले स्तर पर लुढ़क गया। तेल कंपनियों ने आज तेल की कीमतों में 23 पैसे तक की वृद्धि की इससे पेट्रोल व डीजल के दाम अब तक के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गए। इस चिंता में शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। इससे बंबई शेयर बाजार का संवेदी सूचकांक 468 अंक का गोता खा गया।

चिंता की बात यह है कि रुपए की गिरावट अभी थमती नहीं दिख रही है। जाहिर है कच्चे तेल का आयात महंगा होने की वजह से पेट्रोल और डीजल कीमतों में फिलहाल नरमी आने की कोई उम्मीद नहीं है। हालांकि रुपए की गिरावट थामने के लिए आरबीआई ने आज बड़े पैमाने पर डालर की बिकवाली की लेकिन इससे कोई खास राहत नहीं मिल पाइै।

हालांकि राहत की बात यह है कि यूरो, पौंड और येन जैसी अन्य अंतराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबला रुपया बेहतर स्थिति में है। कार्वी के रिसर्च हेड डा. रवि सिंह कहते हैं कि अमेरिका के ईरान पर प्रतिबंध लगाने और चीन के साथ व्यापार युद्ध तेज होने की आशंका से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के भाव चढ़ रहे हैं। भारत अपनी मांग पूरी करने के लिए 80 फीसद तेल आयात करता है जिसका भुगतान डालर में करना पड़ रहा है। इस वजह से रुपया कमजोर बना हुआ है। इस वजह से डालर के मुकाबले रुपए में और कमजोरी के संकेत मिल रहे हैं।

शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

डालर के मुकाबले रुपया के रसातल में चले जाने से सरकार के चालू खाते का घाटा बढ़ने की आशंका बन गई है। इससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई जिससे दलाल स्ट्रीट में बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। बीएसई का सेंसेक्स 468 अंक लुढ़क कर 38,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। सेंसेक्स में यह यह पिछले छह महीने में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। एनएसई का निफ्टी 151 अंक की गिरावट के साथ 11,438 के स्तर पर आ गया। विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) ने आज 300 करोड़ रुपए की बिकवाली की। इससे यह गिरावट और तेज गई है। आज की गिरावट से शेयर बाजार के निवेशकों को 1.96 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

तो सस्ता हो सकता है तेल

सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों में पेट्रोल की लागत करीब 40 और डीजल की 43 रुपए प्रति लीटर आ रही है। केंद्र फिलहाल पेट्रोल पर 19.48 रुपए जबकि डीजल पर 15.33 रुपए प्रति लीटर उत्पाद शुल्क वसूल रहा है। इसके ऊपर राज्य सरकारें विभिन्न प्रकार के स्थानीय कर लगा रही हैं। इस वजह से घरेलू बाजार में पेट्रोल व डीजल के रिकार्ड ऊंचाई पर बने हुए हैं। केंद्र व राज्य सरकारें चाहें तो इन करों में कुछ कटौती करके राहत दे सकती हैं। लेकिन केंद्र ने मना कर दिया है।