राहुल की महत्त्वकांक्षा

,

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजनीतिक दृष्टि से कर्नाटक विधानसभा के बहुत ही निर्णायक चुनाव के बीच जिस अंदाज में प्रधानमंत्री पद पर दावेदारी पेश की है, उसमें आत्मविश्वास कम और उत्साह ज्यादा नजर आया।

हालांकि इस दावेदारी में कोई नई बात नहीं है। पिछले वर्ष सितम्बर में भी बर्कले में छात्रों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा था कि वह प्रधानमंत्री बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सभी जानते हैं कि कांग्रेस के पास राहुल के अलावा  दूसरा विकल्प नहीं है यानी पार्टी नेहरू-गांधी परिवार के अलावा किसी दूसरे नेता पर विचार ही नहीं कर सकती। इसलिए राहुल को जो कहना चाहिए उन्होंने वही कहा भी।

यह भी सच है कि कांग्रेस अखिल भारतीय पार्टी है, और उसके नेतृत्व में कोई संभावित गठबंधन बनता है, तो उसकी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस ही होगी। लिहाजा, प्रधानमंत्री पद के लिए कांग्रेस की ही दावेदारी रहेगी और कांग्रेस का मतलब है राहुल गांधी, जिन्हें गठबंधन का कोई नेता चुनौती नहीं दे सकता।

दरअसल, यह भी उतना ही बड़ा सच है कि मायावती और अखिलेश भले साथ-साथ चुनाव लड़ें, चुनाव जीत भी जाएं और बीजेपी हार भी जाए लेकिन उनमें से कोई एक दूसरे को प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार नहीं करेगा। लेकिन, प्रधानमंत्री पद पर राहुल की दावेदारी से संबंधित बयान इस अर्थ में काफी महत्व रखता है कि कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर उसके संभावित साझेदार दलों में अनेक शंकाएं हैं।

फिर भी, राहुल के इस दावे में काफी दम है, लेकिन उस दावेदारी को और पुख्ता करने के लिए कांग्रेस को कर्नाटक का चुनाव जीतना जरूरी है। कांग्रेस कर्नाटक का चुनाव जीत लेती है, तो राहुल गांधी निर्विवाद रूप से प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में उभर कर सामने आएंगे। लेकिन चुनाव हारने के बाद भी उनकी दावेदारी कमजोर नहीं होगी क्योंकि विपक्षी खेमे में कांग्रेस ही सबसे बड़े दल के रूप में उभरेगी। लेकिन यह जरूरी है कि राहुल गांधी देश के सामने अपना आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण रखें। उन्हें बताना चाहिए कि उनकी भावी भारत की अवधारणाएं क्या हैं?

उन्हें यह भी बताना चाहिए कि भाजपा ऐसा क्या कर रही है, जो सत्ता में आने के बाद कांग्रेस नहीं करेगी? भ्रष्टाचार के कारण यूपीए 2014 का चुनाव हारा था। अब भ्रष्टाचार के मसले पर कांग्रेस का क्या रुख होगा, राहुल को इसे भी स्पष्ट करना होगा। प्रधानमंत्री पद की दावेदारी से संबंधित उनका यह बयान अगर कर्नाटक चुनाव के बाद आया होता तो ज्यादा बेहतर होता।