रामजी अंबेडकर

,

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के नाम के अंदर रामजी डालने के खिलाफ राजनीति दल जो बयानवाजी कर रहे हैं, उसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है। ऐसा तो होना ही है। विपक्ष कह रहा है कि भाजपा बाबा साहेब के नाम पर गंदी राजनीति कर रही है। बाबा साहेब के नाम पर इस देश में राजनीति ही तो हो रही है। दूसरे करें तो ठीक और भाजपा करे तो गलत, यह कैसे हो सकता है! वैसे भी बाबा साहेब के नाम को लेकर देश भर में दो प्रकार के विचार हैं। एक पक्ष मानता है कि चूंकि उनके पिताजी का नाम रामजी था, और महाराष्ट्र में अपने नाम के साथ पिता का नाम जोड़ने की परंपरा है, इसलिए ऐसा किए जाने में कुछ भी गलत नहीं है। दूसरे बाबा साहेब ने स्वयं कई बार अपने नाम को भीमराव रामजी अंबेडकर लिखा है। दूसरा विचार ऐसा न किए जाने का है। वैसे भी उत्तर प्रदेश सरकार ने यह निर्णय राज्यपाल राम नाईक के अनुरोध पर किया है। राम नाईक लंबे समय से इसके लिए सक्रिय रहे हैं, और उन्होंने इस बाबत सरकार को पत्र लिखा था। हम भी मानते हैं कि बाबा साहेब दलितों के साथ होने वाले भेदभाव के कारण हिन्दू धर्म के खिलाफ थे। इसलिए उन्होंने अपने समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। आज वे होते तो अपने नाम के साथ रामजी लगाते या नहीं, कहना कठिन है। किंतु कायदे से उनका पूरा नाम यही होना चाहिए। इस देश में कुछ लोग बाबा साहेब के नाम पर अपना एकाधिकार मानकर राजनीति करते हैं, और जब भी कोई दूसरा ऐसा करता है, तो वे विरोध में खड़े हो जाते हैं। नरेन्द्र मोदी सरकार ने पिछले चार सालों में बाबा साहेब को जितना महत्त्व दिया, उनसे जुड़े स्थलों का पुनरोद्धार किया, उनके जन्म दिवस को पूरे प्रचार के साथ मनाया उससे उन सबको समस्या हुई है। यह मानने में हर्ज नहीं है कि भाजपा भी बाबा साहेब के नाम अपनी राजनीति कर रही है। पर इसमें समस्या क्या है? बाबा साहेब पूरे देश के हैं। कोई भी राजनीतिक दल यदि उनके नाम पर कुछ करता है, तो उसे गलत नहीं माना जा सकता। हां, यदि वह केवल बाबा साहेब का नाम लेता है, और आचरण विपरीत करता है, तो इसका विरोध होना चाहिए। सच यही है कि आज तक बाबा साहेब के नाम पर राजनीति में शीर्ष तक पहुंचने वालों ने यही किया है। इनमें से कौन हैं, जो बाबा साहेब के बताए आदर्शों पर चलते हैं तथा राजनीति एवं सरकारी नीतियों में उनने उनके विचारों को लागू किया है? वास्तव में ऐसे लोगों को बाबा साहेब के नाम लेने का भी हक नहीं होना चाहिए।