राफेल सौदा सही

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वायु सेना द्वारा राफेल लड़ाकू विमान सौदे को सही ठहराने के बयान से यकीनन सरकार को ताकत मिली है। उप वायु सेना प्रमुख एयर माशर्ल एसबी देव ने कहा है कि राफेल सौदे पर विवाद इसलिए उठ रहा है कि लोगों को रक्षा खरीद प्रक्रिया तथा ऑफसेट नीति की जानकारी नहीं है। वायु सेना उप प्रमुख ने रक्षा सौदे के साथ इसकी गुणवत्ता की भी भूरि-भूरि प्रशंसा की है।

मसलन, कहा कि यह ताकतवर विमान है, और वायु सेना उत्सुकता से इसका इंतजार कर रही है। यह जबरदस्त विमान है, और इसकी क्षमता बहुत अधिक है। जो लोग भारत की रक्षा तैयारियों पर नजर रखते हैं, उनको पता है कि हमारी वायु सेना लंबे समय से लड़ाकू विमानों की कमियों के दौर से गुजर रही है। इसका ध्यान रखते हुए ही फ्रांस के साथ आपातकालीन खरीद नीति के तहत राफेल सौदा हुआ है। सितम्बर, 2019 से विमानों की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। वायु सेना इस समय केवल 31 स्क्वॉड्रन से काम चला रही है, जबकि सामान्य अवस्था में इसके पास 42 स्क्वॉड्रन होनी चाहिए। प्रत्येक स्क्वॉड्रन में 16 से 18 लड़ाकू विमान होने हैं।

वस्तुत: देश के अधिकतर रक्षा विशेषज्ञों ने इस विमान सौदे का समर्थन किया है, लेकिन कांग्रेस पार्टी इसे लगातार भ्रष्ट सौदा साबित कर रही है। हालांकि यह दो सरकारों के बीच का सौदा है, जिसमें कोई निजी कंपनी शामिल नहीं है, लेकिन राफेल बनाने वाली कंपनी डसाल्ट द्वारा रिलायंस डिफेंस को भारतीय साझेदार बनाने के कारण इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह बात अलग है कि रिलायंस डिफेंस राफेल से संबंधित किसी प्रकार का उत्पादन नहीं करने जा रही है। वस्तुत: अभी तक राफेल पर केवल राजनीतिक आरोप लगे हैं। ध्यात्वय है कि कांग्रेस ने भी इसकी गुणवत्ता पर कोई प्रश्न नहीं उठाया है।

वह ऐसा कर भी नहीं सकती क्योंकि इस विमान को खरीदने का फैसला उसी के नेतृत्व वाले संप्रग सरकार के कार्यकाल में हुआ था। किंतु उप वायु सेना प्रमुख यदि गुणवत्ता की प्रशंसा के साथ सौदे को भी सही ठहरा रहे हैं, तो इसके सामने कोई भी राजनीतिक आरोप कमजोर पड़ जाता है।

हमारे यहां सेना के ऐसे बयान पर लोग किसी भी राजनीतिक आरोप की तुलना में सही मानते हैं। वैसे भी, वायु सेना का उप प्रमुख बिना पूरी जानकारी के इस तरह खुलकर किसी सौदे को पाक-साफ होने का प्रमाण पत्र नहीं दे सकते। अच्छा होगा कि सौदे पर शंका करने वाले रक्षा खरीद प्रक्रिया का अध्ययन कर फिर अपनी बात रखें।