राफेल करार: अंबानी के नोटिस पर कांग्रेस का पलटवार, कहा - हम डरने वाले नहीं, चुप नहीं बैठेंगे

भाषा, नयी दिल्ली / चंडीगढ

अरबों डॉलर के राफेल करार से अनुचित फायदा पाने को लेकर आरोपों का सामना कर रहे अनिल अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस समूह ने कांग्रेस के कई नेताओं को कानूनी नोटिस भेजकर उनसे कहा है कि वे ऐसे आरोप लगाने से बाज आएं। बहरहाल, कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि अंबानी की कंपनी की तरफ से भेजा गया नोटिस ''भाजपा और कॉरपोरेट जगत के बीच गठजोड़'' का सबूत है।        

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे ऐसे नोटिस से डरने या चुप होने वाले नहीं हैं।        

गौरतलब है कि रिलायंस समूह ने कांग्रेस के कई प्रवक्ताओं और नेताओं को नोटिस भेजा है।       

यह नोटिस ऐसे समय में भेजे गए हैं जब कांग्रेस ने राफेल करार के मुद्दे पर करीब महीना भर तक अभियान चलाने का फैसला किया है। इस अभियान के तहत कांग्रेस के शीर्ष नेता 25 अगस्त से छह सितंबर तक देश भर में संवाददाता सम्मेलन और प्रदर्शन करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को निशाना बनाएंगे। पार्टी ने सात सितंबर से जिला एवं राज्य स्तर पर विरोध प्रदर्शन की भी योजना बनाई है।       

रिलायंस समूह ने करार से जुड़े आरोप नकारे हैं। इस करार के तहत फ्रांस की दशॉ कंपनी लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करेगी। उसने अनिल अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस समूह की एक कंपनी के साथ संयुक्त उपक्रम भी किया है ताकि अनुबंध की 'ऑफसेट' जरूरतें पूरी की जा सकें।         

अंबानी ने राफेल करार के मुद्दे पर हाल में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर कहा था कि इस मामले में ''दुर्भावनापूर्ण निहित स्वार्थो और कॉरपोरेट प्रतिद्वंद्वियों'' द्वारा उनकी पार्टी को ''गलत सूचना दी जा रही है, गलत दिशा में ले जाया जा रहा है और गुमराह किया जा रहा है।''         

राफेल के मुद्दे पर पिछली संप्रग सरकार द्वारा की गई बातचीत में तय हुई कीमत से कहीं ज्यादा कीमत पर करार पर दस्तखत करने को लेकर राहुल मोदी सरकार पर लगातार हमले बोल रहे हैं। उनका आरोप है कि मोदी सरकार ने ''एक कारोबारी'' को फायदा पहुंचाने के लिए यह करार किया।         

चंडीगढ में पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस सांसद सुनील जाखड़ ने कहा कि उन्हें नोटिस मिला है जिसमें कहा गया है कि वह राफेल करार के मुद्दे पर ''आरोप लगाने'' से बाज आएं।        
बहरहाल, जाखड़ ने इस बात पर जोर दिया कि राफेल का मामला कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कानूनी नोटिस ''भाजपा और कॉरपोरेट जगत के बीच गठजोड़'' का नतीजा है।         

कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष एवं लोकसभा सदस्य जाखड़ ने कहा, ''मैं दोहराता हूं, हवाई जहाज बनाने का मेरा कौशल (जैसा कि लोकसभा में दिखाया था) आपसे बेहतर है।''         
जाखड़ ने रिलायंस की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस से कागज का विमान बनाकर उसकी तस्वीर ट्विटर पर डाली।         

उन्होंने कहा, ''यह लोकतंत्र के लिए एक काला दिन है। किसी उद्योगपति की ओर से किसी जनप्रतिनिधि को कानूनी नोटिस भेजना एक गंभीर मुद्दा है।''         

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि रिलायंस की कंपनियों की तरफ से मुंबई के वकीलों द्वारा रणदीप सुरजेवाला, अशोक चव्हाण, अभिषेक मनुसिंघवी और सुनील जाखड़ सहित कई अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि वे ''सरकार से सरकार के बीच हुए अनुबंध में फ्रांस से भारत द्वारा 36 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद के करार के बारे में प्रेस और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अभद्र और मानहानिकारक बयान दे रहे हैं।''         

नोटिस के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्हें दो ऐसे नोटिस मिले हैं।        

उन्होंने कहा कि एक तो पहले ही मिला था जबकि दूसरा कल मिला है जिसमें दावा किया गया है कि उन्होंने कंपनी को 50,000 करोड़ रुपए तक का नुकसान पहुंचाया है।         
गोहिल ने कहा, ''मुझे पहले एक नोटिस मिला था और मैंने यह कहते हुए जवाब दिया था कि जो कुछ भी कहा गया वह सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर कहा गया है। नोटिस दिखाते हैं कि प्रधानमंत्री चिंतित हैं।''

कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुव्रेदी ने कहा कि उन्हें भी एक नोटिस थमाया गया है।        

उन्होंने कहा, '' हम तब तक चुप नहीं बैठेंगे जब तक हमें घोटाले पर हमारे जवाब नहीं मिल जाते।''