योगी राज में अपराध

योगी राज में अपराध, योगी राज में अपराध

उत्तर प्रदेश में एक युवती द्वारा भाजपा विधायक पर बलात्कार के आरोप के कारण राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। हालांकि प्रदेश में इस प्रकार के आरोप का यह कोई पहला वाकया नहीं है।

पूर्व सपा एवं बसपा सरकारों के दौरान भी अनेक विधायकों एवं कई मंत्रियों पर इस प्रकार के आरोप लगे। लेकिन भाजपा सरकार के लिए यह पहली मुसीबत है। इसलिए लोगों की नजर इस पर है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले में क्या करते हैं?

बांगरमऊ उन्नाव से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर यदि मंत्री होते तो शायद उन्हें जांच होने तक हटाया भी जा सकता था, लेकिन वे विधायक हैं। हालांकि आरोप लगा देने मांत्र से किसी को दोषी मान लेना उचित नहीं है।

सेंगर ने भी कहा है कि उन्होंने अपनी ओर से मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इसकी उच्चस्तरीय जांच करने का अनुरोध किया है। अभी तक वे सारे आरोपों से इनकार कर रहे हैं।

जिन परिस्थितियों में आरोपी की पिता की पुलिस हिरासत में मौत हुई, उससे मामला कहीं ज्यादा गंभीर हो गया है। पुलिस ने आरोपी के पिता पर क्यों मुकदमा दर्ज किया, उन्हें क्यों हिरासत में लिया इसकी जांच आरंभ हो गई है और संबंधित पुलिसवालों को निलंबित भी कर दिया गया है।

पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जाचं दल भी गठित हो चुकी है। सीएम ने कहा है कि किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। तो उम्मीद करनी चाहिए कि विशेष जांच दल शीघ्र ही सच्चाई का पता लगाकर कानूनी प्रक्रिया के तहत जो भी कार्रवाई होगी, उस पर निर्भय होकर निष्पक्षता से आगे बढ़ेगा।

विधायक के भाई का आरोपी के पिता से मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया जाना इस बात का संकेत है कि जांच एवं कार्रवाई ठीक दिशा में होगी। अरोपी के मृत पिता के शरीर पर मारपीट के निशान साफ दिखाई दे रहे थे। यानी उनकी बुरी तरह पिटाई की गई।

यह पिटाई पुलिस वालों ने की या विधायक के लोगों ने; या दोनों ने की यह भी जांच के बाद ही पता चलेगा। ऐसी पिटाई कई प्रकार का संदेह उत्पन्न करता है। वास्तव में यह भाजपा के लिए अपनी छवि का भी प्रश्न है। उत्तर प्रदेश की जनता ने बहुत उम्मीद के साथ उसे इतना बड़ा बहुमत दिया है। उस उम्मीद में अपराध पर नियंत्रण एवं अपराधियों के खिलाफ बिना भेदभाव के कार्रवाई भी शामिल है। महिलाओं की सुरक्षा विधान सभा चुनाव में बहुत बड़ा मुद्दा था। इस तरह योगी सरकार के लिए यह पहली अग्निपरीक्षा है।