मोदी की अपील

मोदी की अपील, मोदी की अपील

जम्मू-कश्मीर में रमजान के पवित्र माह में सैन्य अभियान पर रोक के तीन दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सूबे का दौरा बेहद महत्त्वपूर्ण है। श्रीनगर में किशनगंगा पावर स्टेशन के उद्घाटन मौके पर आए मोदी ने प्रदेश के लिए विकास कार्यों की किस कदर अहमियत है, इसे भी सलीके से समझाया। करीब 30 मिनट के भाषण में उन्होंने केंद्र सरकार की तत्परता और राज्य के लोगों के प्रति मोहब्बत का सलीके से जिक्र किया।

बरसों से हिंसा की आग में जल रहे कश्मीर में प्रधानमंत्री मोदी का विकास की बात करना और युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़ने की अपील करना, केंद्र के इस रुख को साफ तौर पर परिलक्षित करता है कि उसके लिए घाटी में अमन कितना अहम है? विकास ही यहां की खुशहाली की कुंजी है, नीति सूत्र भी यही कहता है। हिंसा फैलाने से कुछ भी हासिल नहीं होने वाला।

कश्मीरियत बहाल और बरकरार रखने का सबसे उम्दा तरीका अहिंसक होना और विकास के हर काम में हाथ बंटाना है। प्रधानमंत्री का जोर भी इसी बात को लेकर था। साफ तौर पर उन्होंने युवा समाज से डॉयलाग किया और हिंसा की मंशा त्यागने का आग्रह किया। दिल्ली में सत्तारूढ़ राजग सरकार और राज्य में महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में भाजपा-पीडीपी गठबंधन की सरकार राज्य की प्रगति और खुशहाली के लिए चिंतित भी है और संजीदा भी, यही संदेश मोदी ने देने का प्रयास किया। पकिस्ताना का नाम लिये बिना मोदी ने इशारों-इशारों में पाकिस्तान की साजिश का हर एक पत्ता खोल कर रख दिया।

यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि पाकिस्तान ने राज्य के युवाओं को साजिशन हिंसक और उन्मादी बना दिया है। जिन हाथों में कलम होने चाहिए, उन हाथों में बंदूकें हैं। और यही चिंता का सबब है। किसी भी राज्य की ताकत और प्रगति का पैमाना उसकी युवा फौज से लगाया जाता है। कश्मीर के युवा मन की भी बेसाख्ता हसरतें हैं, जो आतंकवाद और उन्माद की आग में राख हो गई। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री महबूबा की सकारात्मक पहल से हालात बेहतर होंगे, इस बात में कोई शक-शुबहा नहीं है। नि:संदेह स्थितियां दुरूह हैं, मगर शांति का कोई विकल्प नहीं है।

पत्थरबाजों और आतंकवाद की राह पकड़ने वाले युवाओं को समझना होगा कि उनकी दिक्कतों का हल आतंक नहीं बल्कि राज्य की स्थिरता और अमन बहाली है।