मोदी का कांग्रेस पर हमला

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पंजाब के मुक्तसर जिले के मलौट में किसानों को केन्द्र में रखकर कांग्रेस पर जितना तीखा हमला बोला उसका अर्थ बिल्कुल स्पष्ट है। यानी आगामी विधानसभा चुनावों एवं लोकसभा चुनाव में भाजपा एवं सहयोगियों के लिए किसानों के लिए सरकार द्वारा किया काम बड़ा मुद्दा होगा।

मोदी ने अपनी सरकार को किसान का सबसे हितैषी सरकार साबित किया तो कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने अपने शासन में किसानों का केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल कर इनका शोषण किया। 14 खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने के निर्णय को मोदी, अन्य मंत्री और भाजपा के नेता बड़े कदम के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।

मोदी और उनके सहयोगियों का पूरा फोकस इस बात को साबित करने पर है कि जहां कांग्रेस ने अपने शासनकाल में किसान और कृषि को तवज्जो नहीं दी और इनकी अनदेखी की वहीं उनकी सरकार ने किसानों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं, जिनसे किसान लाभान्वित होंगे। इसमें दो राय नहीं कि सरकारों ने अपने भाषणों और घोषणाओं में किसान और कृषि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता अवश्य दर्शायी लेकिन किसानों की दशा बिगड़ती गई।

आज यदि कोई चाहकर किसान नहीं बनना चाहता तो इसका पूरा दोष पूर्व की सरकारों पर ही जाएगा। चूंंकि कांग्रेस ने सबसे लंबे समय तक शासन किया है इसलिए वह सबसे ज्यादा दोषी मानी ही जाएगी। यह भी सच है कि अभी मोदी सरकार के कदमों से कृषि के क्षेत्र में प्रत्यक्ष कोई चमत्कार नहीं दिख रहा है, पर इसने किसानों को फोकस में रखा है यह सच है।

मोदी सरकार इस तरह का स्थायी तंत्र एवं मूलभूत सुविधाएं विकसित करने पर काम कर रही है, जिससे भविष्य में कृषि को मजबूत आधार मिल जाए। उदाहरण के लिए फसल बर्बाद न हो इसके लिए प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना चल रही है। नये गोदाम और फूड पार्क बनाए जा रहे हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसान को फसल नष्ट होने से नुकसान न उठाना पड़े।

यूरिया अब स्थायी रूप से सुलभ हो गया है। कई सिंचाई परियोजनाओं पर काम हो रहा है। मिट्टी जांच के लिए नौ हजार से अधिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। सरकार का दावा है कि 15 करोड़ से ज्यादा किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। इस तरह ऐसे अनेक काम गिनाए जा सकते हैं, जिनसे पता चलता है कि मोदी सरकार का रवैया किसानों के संदर्भ में अलग है।