मॉनसून से उम्मीदें

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देश के लिए राहत भरी खबर है। मौसम विभाग ने इस खरीफ सीजन के लिए सामान्य मॉनसून की संभावना जताई है। इसका सीधा और सामान्य सा अर्थ है कि देश भर में झमाझम बारिश होगी, जिससे आर्थिक वृद्धि में ज्यादा तेजी आएगी।

विभाग ने कहा है कि बारिश की संभावना 97 फीसद है। वैसे पिछले साल भी सामान्य मॉनसून की संभावना मौसम विभाग ने जताई थी, लेकिन 15 फीसद जिलों में बाढ़ आई तो 38 फीसद जिले सूखे रहे थे। वहीं 640 जिलों में से सिर्फ 40 फीसद सामान्य बारिश हुई थी।

हालांकि अभी कुछ भी आशंका जताना सही नहीं होगा, फिर भी मॉनसून की भविष्यवाणी का फायदा उठाने के लिए देश के हर एक ब्लॉक में मॉनसून मैनजमेंट (प्रबंधन) की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है ताकि खराब मॉनसून से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। वैसे सामान्य मॉनसून के एलान से शेयर बाजार झूम उठा है, किंतु किसानों के साथ-साथ देश का हरेक तबका तभी जश्न मनाएगा जब बारिश अच्छी और अपने लय में हो।

चूंकि कृषि का अर्थव्यवस्था में सीधा योगदान है। इसलिए अर्थव्यवस्था को मजबूती मॉनसून से ही मिलती है। वैसे भी देश की कृषि निर्भर दो अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए बारिश किसी अमृत से कम नहीं है। देश में आधी से ज्यादा खेती बारिश पर निर्भर रहती है। सो जहां सिंचाई के साधन नहीं हैं, वहां बारिश होने से फसल अच्छी होगी।

जहां सिंचाई के साधन हैं, वहां समय पर अच्छी बारिश से किसानों को नलकूप नहीं चलाने पड़ेंगे। डीजल की बचत होगी। कहने का तात्पर्य है कि उनकी लागत बढ़ेगी। कुल मिलाकर अच्छे उत्पादन से न केवल किसानों को फायदा होगा बल्कि सरकार भी राहत की सांस लेगी।

इससे पहले 2016 में सामान्य मॉनसून आया जबकि 2014 और 2015 में लगातार दो खराब मॉनसून के बाद देश का समग्र विकास प्रभावित हुआ। मोदी सरकार का यह अंतिम साल है। इस लिहाज से बेहतर बारिश से बाकी सेक्टर्स की तरह सरकार का लय-ताल भी सधेगा। हाल के वर्षो में मॉनसून की अनिश्चितता ने हर किसी को परेशान किया है।

खासकर अन्नदाताओं को ज्यादा मायूसी हुई है। इस नाते बारिश के पानी को बेहतर और समझदारी के साथ इस्तेमाल और भंडारण भी एक महत्त्वपूर्ण पहलू है। भूजल वैज्ञानिकों और स्वयंसेवी संस्थाओं को तारतम्यता के साथ आगे बढ़कर इसे मजबूती देनी होगी।